27 एलकेएच 4, 17
जिला अस्पताल में बंदी की मौत
घर वालों ने प्रताड़ना से मौत होने का लगाया आरोप
गो वध अधिनियम में पखवाड़े भर से बंद था जावेद
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। गो वध अधिनियम के मामले में जिला कारागार में रविवार की सुबह एक बंदी अचानक चक्कर खाकर गिर गया। जेल प्रशासन ने उसे आनन-फानन जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक की पत्नी और घर वालों का कहना है कि मौत जेल प्रशासन की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की वजह से हुई है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
थाना मैलानी के गांव कुकरा निवासी लाला का 40 वर्षीय पुत्र जावेद गोवध मामले में फरार था। पुलिस के दबाव बनाने पर 14 मई 2018 को उसने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। जहां से कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया था। तभी से वह जेल में था। जेल प्रशासन के मुताबिक रविवार की सुबह करीब साढ़े 10 बजे जावेद ने स्नान किया। इसके बाद बैरक के पास पहुंचा। करीब पौने 11 बजे उसे चक्कर आया और गिर पड़ा। जेल सिपाहियों की सूचना पर जेलर ज्ञानप्रकाश, जेल चिकित्सक के साथ मौके पर पहुंचे। अफसरों ने उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से डॉक्टर ने हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जेल प्रशासन ने सरकारी एंबुलेंस से उसे सुबह 11.05 बजे जिला अस्पताल भेजा, जहां उपचार के दौरान 11.30 मिनट पर उसकी मौत हो गई। इधर बंदी की हालत बिगड़ने पर करीब 11 बजे जेल प्रशासन ने बंदी के घर वालों को पुलिस चौकी के माध्यम से सूचना भेजी। बंदी की पत्नी सोनी जावेद से मुलाकात करने के लिए जेल पहुंची। यहां उसे पति के बीमार होने की सूचना मिली। जब वह अस्पताल पहुंची तो पति का शव देख रोने-विलखने लगी। पत्नी और मृतक के घर वालों का आरोप है कि जावेद को कोई बीमारी नहीं थी। जेल प्रशासन की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना ने जावेद को मौत के मुंह में झोक दिया है।
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बंदी जावेद को सुबह बैरक के पास अचानक चक्कर आया और वह गिर गया था। उसे जेल के अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां से डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। उपचार के दौरान बंदी की मौत हुई है। शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप बिल्कुल गलत है। शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराया जाएगा। - ज्ञान प्रकाश, जेलर, जिला कारागार
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पति से मिलने पहुंची तो मिली मौत की खबर
छह बच्चों की परवरिश को लेकर परेशान है सोनी
लखीमपुर खीरी। अपने छह बच्चों के साथ सोनी पति से रविवार को जिला जेल में मिलने आई थी, लेकिन उसे पति के मरने की मनहूस खबर मिली। इससे उसका रो-रोकर बुरा हाल है। उसका कहना है कि उसके तीन पुत्रियां और तीन पुत्र हैं। सभी छोटे हैं। बच्चों की परवरिश की चिंता अब उसे सताए जा रही है।
गांव कुकरा निवासी सोनी बताती हैं कि कई साल से वह अपने पति के साथ ईंट भट्ठे पर काम करने जिला गोंडा चली गईं। वहीं पति के साथ काम करती थी। उसके पति बीड़ी, गुटका तक नहीं खाते थे। रविवार को वह बच्चों को लेकर पति से मिलाई करने गोंडा से आई थी। मुलाकाती प्रक्रिया पूरी कर वह जेल परिसर में गई। जहां उसने अपने पति को तलाश किया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। जेल में उसके सादे कागज पर अंगूठे लगवाए गए। उसके बाद एक सिपाही ने बताया कि उसके पति की हालत खराब है। इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा है। उसे जिला अस्पताल भी नहीं पता था। किसी तरह से वह जिला अस्पताल पहुंची तो उसे पति की लाश मिली।
पुलिस ने झूठा फंसाया, कोर्ट में हुआ था हाजिर
मृतक की पत्नी सोनी देवी बताती हैं कि पुलिस ने गोवध के किसी मामले में उसके पति के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कर ली। जिस समय की पुलिस घटना बता रही है। उस समय वह और उसका पति गोंडा में काम पर थे। पुलिस ने फर्जी तरीके से उसके पति का नाम रिपोर्ट में लिखकर हाजिर करने का दबाव घर वालों पर बनाया। इस पर उसने 14 मई 2018 को अपने मायके वालों के साथ पति को लाकर कोर्ट में हाजिर करा दिया था। तब से पति जेल में थे।
माहौल गरमाया तो बुलाई पुलिस
शव गृह पर मृतक बंदी जावेद के परिवार वाले जेल प्रशासन को मौत का दोषी बता रहे थे। उनमें रोष भी था। माहौल गरमाते और अधिक भीड़ को देखते हुए शव गृह पर कई दरोगा और पुलिस कर्मियों को बुलाकर तैनात कर दिया गया।
पहली बार पति से जेल में मिलने आई थी सोनी
सोनी ने बताया कि जब से उसके पति जेल में बंद हुए तब से वह पहली बार रविवार को मुलाकात करने आई थी। सोमवार को पति की जमानत होनी थी। पिछले रविवार को उसकी ननद रेशमा पति से मिलकर गई थी। उस समय जावेद बिल्कुल ठीक थे।