लखीमपुर खीरी।
अपराध वाली जगह पर तुरंत पुलिस सहायता पहुंचाने के मकसद से यूपी 100 का गठन किया गया था, लेकिन शरारती तत्व फोन पर झूठी सूचनाएं देकर उन्हें खूब छका रहे हैं। वजह यह है कि यूपी 100 का काम केवल मौके पर पहुंचकर अपराधियों और पीड़ितों को थाने तक पहुंचाना है। उनके पास खुद कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है, इसी के चलते शरारती तत्वों में इसका कोई खौफ नहीं है।
करीब एक साल पहले सूबे के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव ने आम लोगों को आकस्मिक सुरक्षा सेवाएं मुहैया कराने के लिए यूपी 100 चलाने का निर्णय लिया था। प्रदेश में 108 की तर्ज पर सभी जिलों में यूपी 100 सेवा चालू की गई थी। इस परियोजना के लागू होने के बाद जनता को काफी सहूलियत मिली है। यूपी 100 में जिले के ही कांस्टेबिल, हेडकांस्टेबिल और दरोगा शामिल हैं। यूपी 100 की पीआरवी (पब्लिक रिस्पांस वैन) पर तैनात पुलिसकर्मियों की मानें तो प्रतिदिन 15 से 20 कॉल ऐसी होती हैं, जिनकी सूचना पर जब पुलिस मौके पर पहुंचती है तो सूचना देने वाले का नंबर स्विच ऑफ होता है और घटना भी फर्जी मिलती है। झूठी सूचना देकर परेशान करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
इससे पहले जिले में सिटी कंट्रोल रूम के 100 समेत अन्य नंबर पर लोगों को कॉल कर सूचना देने की सुविधा थी। तब भी ऐसे खुराफाती तत्व पुलिस को झूठी सूचना देकर खूब छकाते थे। यही रवैया यूपी 100 के साथ भी हो रहा है। यूपी 100 कर्मचारियों की मानें तो पीआरवी को कोई अधिकार भी नहीं दिए गए हैं। कर्मचारियों ने बताया कि पीआरवी सूचना पर मौके पर पहुंचती है और दोनों पक्षों को लेकर कोतवाली या संबंधित थानों पर पहुंचती है तो अक्सर संबंधित थाने की पुलिस समझौता कराकर छोड़ देती है। यहां तक दोनों पक्षों पर शांतिभंग करने की भी कार्रवाई नहीं करती है।
डीजल की बर्बादी के साथ
खराब होता है समय
सूचना पर पीड़ित के दरवाजे तक पहुंचने वाली यूपी 100 के झूठी सूचना पर पहुंचने से जहां डीजल की बर्बादी होती है। वहीं पीआरवी का काफी समय भी बर्बाद होता है। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि जरूरतमंदों को समय से सुविधा भी नहीं मिल पाती है।
अफसर थानोें से करें पूछताछ
तो लग सकती है लगाम
पीआरवी द्वारा पकड़कर थाने लाए गए लोगों के बारे में की गई कार्रवाई पर पुलिस अफसर कोई जानकारी नहीं लेते हैं। शायद यही वजह है कि थाना स्तर पर महिला अपराधों से लेकर छोटे-मोटे अपराधों में पकड़कर आने वाले लोगों से पुलिस साठगांठ कर लेती है और दोनों पक्षों के बीच दबाव बनाकर समझौता करा देती है। यदि पुलिस अफसर थाने लाए गए लोगों के मामलों की मानीटरिंग करें तो इस पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
झूठी सूचना देने पर अब तब करीब 10 लोगों को चिन्ह्ति कर कार्रवाई की जा चुकी है। छोटे-मोटे मामलों, आपसी विवाद के मसलों को नियमानुसार थानों पर निपटाया जा सकता है। यदि गंभीर मामलों में कार्रवाई नहीं होती तो यह गंभीर बात है। इसे अपने स्तर से दिखवाएंगे।
- घनश्याम चौरसिया, एएसपी खीरी