सर्द मौसम में कारागार के बंदी ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 1600 बंदियों वाले जिला कारागार में औसतन 300 बंदियों का रोज इलाज होता है। इनमें से 10 से 15 बंदी ऐसे होते हैं, जिन्हें भर्ती तक कराना पड़ जाता है। बीमार पड़ने वालों में अधिकतर पुरुष बंदी शामिल हैं। महिला बंदी कभी-कभार ही दवा लेने जेल अस्पताल पहुंचती हैं। धौरहरा निवासी बंदी तरवारीलाल के सिर में चोट लगने के बाद उसकी मौत हो जाने और मितौली के बंदी शिव सिंह यादव की फरारी के बाद कारागार का अस्पताल चर्चाओं में है। अधिकारियों के मुताबिक कारागार के बीमार बंदियों की संख्या बढ़ रही है लेकिन काफी हद तक इन बंदियों का इलाज जेल अस्पताल में ही होता है।
जेल अस्पताल में सिर्फ एक डॉक्टर
बंदियों का बेहतर इलाज हो सके, इसके लिए कारागार में डॉक्टरों के दो पद सृजित हैं, लेकिन कई वर्षों से एक ही डॉक्टर तैनात है। इससे बंदियों के इलाज में काफी परेशानी होती है।
अनुभवी डॉक्टर की कमी बनी परेशानी
कारागार अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉक्टर शब्बन अली को तैनात किया गया है। जेल डॉक्टर के रूप में उनकी यह पहली तैनाती है। जेल में सीनियर डॉक्टर नहीं है। अधीक्षक एचआर दोहरे बताते हैं कि बंदी तरवारी लाल की मौत के बाद कारागार में अनुभवी डॉक्टर तैनात करने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। बंदी शिवसिंह को जिला अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद भी पत्र भेजा गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने दूसरे पत्र की भी सुधि नहीं ली। इससे कारागार के बंदी दिक्कतों से जूझ रहे हैं।