लखीमपुर खीरी। राजापुर मंडी में 1214 सरकारी बोरों में बरामद गेहूं के मामले में अधिकारियों ने शुरुआत से ही कार्रवाई और जांच में लापरवाही बरती, जिसका नतीजा रहा कि अभी तक गेहूं मालिक का पता नहीं लगाया जा सका। इसके अलावा सरकारी बोरे किस एजेंसी के थे, जो अभी तक राज बना हुआ है। डीएम आकाशदीप ने अधिकारियों की लापरवाही को भांपते हुए प्रकरण की जांच एडीएम न्यायिक रामसुमेर वर्मा को सौंप दी है।
बता दें कि आठ जून को एसडीएम सदर के निर्देश पर नायब तहसीलदार ने राजापुर मंडी का निरीक्षण कर वहां आढ़तियों के फड़ पर बड़ी मात्रा (करीब दो हजार बोरे) में सरकारी बोरों में गेहूं भरे जाने की रिपोर्ट दी थी। इसके बाद डिप्टी आरएमओ को कार्रवाई करने के निर्देश दिए, लेकिन कार्रवाई में देरी होने से मौके पर सिर्फ 1214 बोरे ही बरामद हो सके थे। इस कार्रवाई के दौरान अवैध तरीके से सरकारी बोरों में गेहूं भरकर क्रय केंद्रों को सप्लाई करने वाले दोषी आढ़तियों को बचाने के लिए पूरे प्रयास किए गए, जिसका नतीजा है कि अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर खानापूर्ति कर दी गई। मसलन मौके पर आढ़तियों की फड़ पर काम कर रहे पल्लेदारों के बयान नहीं लिए गए, जो आढ़तियों की शिनाख्त में काफी महत्वपूर्ण कदम (सुबूत) बन सकता था। इसके साथ ही मंडी अधिकारियों ने भी कुछ भी जानकारी होने से पल्ला झाड़ लिया था, जो आला अधिकारियों के गले नहीं उतरा है। कारण भी है कि मंडी के अंदर चबूतरों पर होने वाली नीलामी प्रक्रिया में भी अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। ऐसे में खुलेआम मंडी परिसर में गेहूं सरकारी बोरों में भरे जाने की जानकारी होने से इंकार करना बड़े गठजोड़ की ओर इशारा कर रहा है। एक वजह यह भी है कि सीतापुर की मंडी से काफी मात्रा में गेहूं मंगाकर राजापुर मंडी में ही खपा दिया गया, जिसकी जांच से अधिकारी कतरा रहे थे।
बाक्स=वर्जन
सरकारी बोरों में गेहूं की बरामदगी का गंभीर प्रकरण होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई करने में लापरवाही बरती है। इसकी भी जांच कराई जाएगी कि कौन-कौन लोग इस धंधे में लिप्त हैं। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी एडीएम न्यायिक को सौंपी है।
आकाशदीप, डीएम
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