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मामूली विवाद में किसान की गला दबाकर हत्या

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मोहम्मदी।
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पहले गन्ना तुलवाने को लेकर गुरुवार को गन्ना क्रयकेंद्र पर गांव मुकुंदापुर निवासी फूलचंद और उसके पड़ोसी के बीच तकरार हो गई थी। नाराज हमलावरों ने शुक्रवार की शाम पांच बजे 55 वर्षीय फूलचंद को उसके घर के दरवाजे पर ही दबोच लिया। पिटाई करने के बाद उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और फरार हो गए। परिवार वालों ने अभी किसी के खिलाफ कोई तहरीर पुलिस को नहीं दी है।
गांव मुकुंदापुर के बाहर बजाज चीनी मिल का गन्ना क्रय केंद्र है। गांव मुकुंदापुर निवासी रघुवीर ने बताया कि गुरुवार की दोपहर उसके पिता फूलचंद ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर गन्ना तुलवाने क्रय केंद्र पर गए थे। जहां गांव के ही रामनरेश और उसके भाई राजेश भी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर गन्ना तौल कराने गए थे। पहले ट्रॉली तुलवाने को लेकर पिता फूलचंद का राम नरेश और राजेश से विवाद हो गया था। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह बीच बचाव कर दोनों पक्षों को शांत करा दिया था। इससे रामनरेश और राजेश नाराज थे। शुक्रवार की शाम करीब पांच बजे उसके पिता घर के दरवाजे पर खड़े थे। आरोप है कि इसी बीच आरोपी रामनरेश अपने दोनों भाई राजेश और दिनेश के साथ आ धमके। तीनों भाइयों ने उसके पिता को पकड़ लिया और पिटाई कर दी। इस दौरान पिता का गला दबा दिया, जिससे पिता की मौके पर ही मौत हो गई। इससे घर में कोहराम मच गया।
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घटना के बाद हमलावर अपने घर में ताला डालकर मौके से फरार हो गए। घटना से पूरा गांव सन्न रह गया। सरेशाम हत्या की सूचना पाकर सीओ विजय आनंद, एसएसआई उमेश्वर यादव भारी पुलिस फोर्स के गांव पहुंचे। सीओ ने घटना स्थल का निरीक्षण किया और मृतक के बेटे और उसके घरवालों से घटना की जानकारी ली। एसएसआई उमेश्वर यादव ने बताया कि अभी तहरीर नहीं मिली है। पोस्टमार्टम के लिए शव भेजा जा रहा है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

पत्नी की पहले हो चुकी है मौत
मृतक फूलचंद की पत्नी की करीब छह महीने पहले मौत हो चुकी है। उसके एक पुत्र 25 वर्षीय रघुवीर, दो पुत्रियां ऊषा और पुष्पा विवाहित हैं, जबकि मीरा, रेशमा अविवाहित हैं। पिता की हत्या होने के बाद पुत्र और पुत्रियों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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चीखता-चिल्लाता रहा पर कोई मदद को नहीं आया
मृतक फूलचंद का बेटा रघुवीर बताता है कि जब हमलावर पिता को पीट रहे थे तो उसने अपनी छोटी बहनों के साथ मिलकर पिता को बचाने की बहुत कोशिश की। इस दौरान काफी लोगों की भीड़ भी लगी थी। पिता के साथ वह भी भीड़ से पिता को बचाने की खुशामद करता रहा, लेकिन हमलावरों के आंखों में उतरे खून को देखकर कोई आगे नहीं आया। वह कहता है कि यदि लोग आगे आ जाते तो शायद उसके पिता की जान नहीं जाती।
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