लखीमपुर खीरी। जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही और देरी का एक और मामला सामने आया है, जिसमें सीडीओ अमित सिंह बंसल ने दोषी पाए गए लखीमपुर ब्लॉक (सदर) के बीडीओ विपिन चौधरी को कठोर चेतावनी दी है। मनरेगा योजना में गड़बड़ी की शिकायत पर सीडीओ ने बीडीओ को जांच सौंपी थी, जिसकी जांच बीडीओ ने स्वयं न करके अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) से कराई। एपीओ ने मामले को सस्ते में निपटाते हुए अधूरी जांच रिपोर्ट दे दी। लिहाजा सीडीओ ने एपीओ संतोष कुमार पांडेय और खेतौसा के ग्राम विकास अधिकारी आईएच अंसारी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
सदर ब्लॉक की ग्राम पंचायत खेतौसा निवासी राजेंद्र प्रसाद ने 17 अगस्त 2016 को शिकायत करते हुए ग्राम प्रधान पर मनरेगा योजना में घोटाला करने का आरोप लगाया था। इस पर संज्ञान लेते हुए आयुक्त ग्राम्य विकास ने डीएम को जांच कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीडीओ के निर्देश पर उपायुक्त श्रम रोजगार हसीब अंसारी ने 19 सितंबर 2016 को मामले की जांच लखीमपुर के बीडीओ विपिन चौधरी को सौंपते हुए तीन दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद कई महीने बीतने पर शिकायतकर्ता ने 16 मई 2017 को तहसील दिवस में पुन: शिकायत की। इसके बाद सीडीओ ने मामले की खुद ही पड़ताल शुरू की, तो पाया कि बीडीओ ने शिकायत की गंभीरता को नजर अंदाज करते हुए स्वयं जांच ही नहीं की। एपीओ संतोष कुमार द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट में ही गड़बड़ी के साक्ष्य मिल गए, जिसमें सीडीओ ने पाया कि जॉब कार्डधारक संदीप कुमार और संतराम के हस्ताक्षरयुक्त बयान और संलग्न मस्टर रोल की प्रति पर किए गए हस्ताक्षरों में अंतर मिला है। इसे जांच अधिकारी (एपीओ) ने सिरे से नजर अंदाज करते हुए इस बाबत कोई टिप्पणी भी नहीं की। सीडीओ ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए बीडीओ को भी सवालों के कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने बीडीओ को कठोर चेतावनी के माध्यम से कर्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति लापरवाह माना है और जांच आख्या नौ माह की देरी से प्रस्तुत करना शासन की मंशा के खिलाफ बताते हुए चेतावनी दी हैै। साथ ही निम्र स्तर की जांच रिपोर्ट को आयुक्त ग्राम्य विकास को भेजने से पहले दुरुस्त जांच करने के निर्देश दिए हैं।
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