फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बस्तौली में दुकान पर सो रहे ग्रामीण सिर में गोली मारकर हत्या

विज्ञापन
हत्‍या - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बिजुआ (खीरी)। शनिवार की रात भीरा थाना क्षेत्र के बस्तौली गांव निवासी दिव्यांग गुलाम हुसैन (50) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक भीरा लखीमपुर राजमार्ग के किनारे गांव के पास ही पंक्चर की दुुकान और सर्विस सेंटर की रखवाली करता था। मृतक के दामाद की तहरीर पर पड़ोस के ही चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा लिखा गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
विज्ञापन

बिजुआ पुलिस चौकी क्षेत्र के बस्तौली गांव निवासी गुलाम हुसैन (50 साल) पुत्र तौले के बीमारी के चलते दोनों पैरों के पंजों को काटा जा चुका था। वह करीब 17 साल से नकली पैरों के सहारे जिंदगी जी रहा था। दिव्यांगता के चलते ट्राई साइकिल पर कपड़े रखकर वह गांवों में फेरी लगाकर गुजर-बसर कर रहा था। गुलाम हुसैन की दो बेटियां, सब्बो और सन्नो के अलावा पत्नी जुलेखा है। बड़ी बेटी सब्बो की शादी पत्नी के भांजे वकील से करने के बाद उसे ही घर पर रख लिया था। कुछ माह पहले उसने अपने दामाद को बस्तौली गांव के विनोद सिंह की गांव के बाहर बनीं दुकानों में पंक्चर और वाहन धुलाई की दुकान खुलवा दी थी। सामान की देखरेख करने के लिए रात को इसी दुकान पर वह खुद रुकता था। पत्नी के मुताबिक आठ दिन पहले गांव के ही दो युवक उसके पति को धमकी देकर गए थे कि अगर यहां दुकान रखी तो गायब हो जाओगे। इस बात का उसने पत्नी के अलावा दुकान के पास रह रही एक महिला समेत कई लोगों से जिक्र किया था।
शनिवार रात को करीब सात बजे खाना खाकर गुलाम हुसैन दुकान पर आकर लेट गया। सुबह सात बजे लोगों ने देखा कि उसके सिर में किसी ने गोली मारकर हत्या कर दी है। घटना की जानकारी होते ही इलाके में दहशत फैल गई। सूचना पर पहुंचे एसओ संदीप सिंह एवं चौकी प्रभारी मनोज कुमार ने गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया है।
विज्ञापन


बस्तौली गांव में हत्या के मामले में दामाद वकील की तहरीर पर गांव के ही चार लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। जल्द ही हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- अभिषेक प्रताप, सीओ-गोला


हत्याकांड के पीछे ठोस वजह तलाश रही पुलिस
- आरोपियों की अक्सर होती थी दुकान मालिक से कहासुनी
 
बिजुआ।
गुलाम हुसैन हत्याकांड में नामजद लोगों की मृतक से इतनी बड़ी दुश्मनी नहीं थी कि कोई उसकी जान ले लेता। गुलाम हुसैन काफी सीधा था। वहां आरोपियों के घर मृतक के घर के करीब में ही हैं। आरोपी एवं दुकान मालिक के बीच आए दिन कहासुनी होती रहती थी। आरोप है कि इन्हीं दुकानों से गुलाम हुसैन को हटाने के लिए हत्या हुई, लेकिन इस हत्याकांड के बाद भी तो दुुकानें नहीं हटीं? ऐसे में वादी के द्वारा लिखाई गई तहरीर में पुरानी रंजिश जैसा कोई कारण समझ में नहीं आ रहा है।

 
सिरहाने रखता था एक फिट का चाकू
बिजुआ। किसी अनहोनी से निबटने के लिए अपने सिरहाने एक फिट लंबा चाकू रखकर सोने वाले गुलाम हुसैन की इतनी भी नहीं चली कि वह वहां तक अपना हाथ भी ले जा सका। दामाद वकील की मानें तो जब से उसके ससुर को धमकी मिली थी, वह काफी डर गए थे, लेकिन उन्होंने कभी जाहिर नहीं होने दिया। एक दिन गुलाम हुसैन ने खुद को खतरा बताया तो दामाद ने दुुकान से लंबा चाकू निकालकर दे दिया कि अपनी सुरक्षा के लिए इसे लेकर लेटा करो, लेकिन मौत इतने दबे पांव आई कि गुलाम को चाकू क्या आवाज निकालने तक का समय नहीं मिला।
पत्नी जुलैखा कहती हैं कि कल रात को घना कोहरा देखकर उसने कहा था कि दुकान पर सर्दी होगी, घर पर ही सो जाओ... तो गुलाम ने कहा कि ऐसे में चोरों का डर है, कहीं कोई सामान न चोरी कर ले, इसलिए वह वहीं रुकेगा। गुलाम अपने सोने से पहले पड़ोसियों के पास भी रुका और बिस्तर पर जाने से पहले खुद की हिफाजत के लिए सिरहाने चाकू रखना नहीं भूला। उसे गोली इतनी नजदीक और इत्मीनान से मारी गई कि सिरहाने की तरफ लगी मच्छरदानी भी तमंचे से जल गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें