गौरीफंटा। थारु जनजाति की आदिवासी महिलाओं ने वनकर्मियों पर पिटाई और अभद्रता करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि आरोपियों ने उनके कपड़े फाड़ दिए और छेड़छाड़ भी की। बड़ी संख्या में महिलाओं ने गौरीफंटा कोतवाली पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी है, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।
थारु गांव कजरिया की महिलाओं ने बताया कि 15 जून को वह वन बीट संख्या तीन नंबर के जंगल पास अपने पारंपरिक अधिकार, ऐतिहासिक वनाधिकार कानून-2006 व संशोधन 2012 में मान्यता दिये गए अधिकार के तहत जंगल के ताल से मछली मार कर लौट रहीं थीं। गांव वापस आते समय वन विभाग के 40-45 लोग मिल गए। आरोप है कि सभी ने उनका रास्ता रोक लिया और 10-10 हजार रुपये मांगने लगे। महिलाओं ने बताया कि जब उन्होंने वनकर्मियों से कहा कि कानून के मुताबिक मछली मार कर ला रही हैं तो वनकर्मियों ने धमकाते हुए हवाई फायर किए। मारपीट करते हुए कपड़े फाड़ दिए और अश्लील हरकतें कीं। मारपीट में कई महिलाएं चुटैल हो गईं। वनकर्मी जान से मारने की धमकी देते भाग निकले। मंगलवार को भारी संख्या में ग्रामीणों के साथ पीड़ित महिलाएं गौरीफंटा कोतवाली पहुंची और 13 लोगों के नामजद कर 30 अन्य अज्ञात वनकर्मियों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।
महिलाओं व वनकर्मियों में कुछ विवाद हुआ था। दोनों पक्षों को गौरीफंटा कोतवाली बुलाया गया था। मामले में दावा फार्म वन विभाग से मांगे गए, लेकिन वह नहीं मिल सके हैं। वार्डेन के आने तक मामला बृहस्पतिवार तक बढ़ाया गया है। वार्डेन के आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रदीप कुमार यादव सीओ पलिया