लखीमपुर खीरी। जो अंदेशा था वही हुआ। जिले में सड़कों पर दौड़ रहीं रसूखदारों के पास कई लग्जरी कार बरामद हुईं, फिर भी पुलिस ने उन्हें अभयदान दे दिया। यह बात तब साफ हो गई, जब एसपी ने सोमवार को बरामद कारों का खुलासा किया। पुलिस ने 14 कारों के साथ आठ लोगों को गिरफ्तार करना दर्शाकर चालान कर दिया है। खुलासे को लेकर कई सवाल उठे, जिनका जवाब देने के बजाय एसपी सिर्फ यह कहकर टाल गईं कि जांच होगी।
जिले में हफ्तेभर से स्वॉट टीम थाना खीरी पुलिस के साथ छापेमारी कर रही थी। शाहजहांपुर समेत आसपास के जिलों में भी छापेमारी की गई थी। कई कारों के साथ करीब 12 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। जिले के राजनीतिक और रसूखदारों के पास से अधिकतर कारें बरामद हुईं थीं। अमर उजाला ने पहले ही आशंका जताई थी कि पुलिस एक नेता और कई रसूखदारों को बचाने के प्रयास में जुटी है, जो सच साबित हुई। एसपी ने सोमवार को पूरे मामले का खुलासा तो कर दिया, लेकिन यह खुलासा पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ गया है। एसपी ने बताया कि पुलिस ने शहर में विभिन्न स्थानों से 14 कारें बरामद कर शहर के मोहल्ला शांतीनगर निवासी गैंगलीडर आलोक कुमार श्रीवास्तव सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। कार सेल का काम करने वाला आलोक श्रीवास्तव अपने साथी मोहल्ला द्वारिकापुरी निवासी राघवेंद्र सिंह उर्फ पापू के साथ मिलकर दिल्ली, नोएडा समेत कई स्थानों से वाहन चोरी कर लाते थे, जो गाड़ी एक्सीडेंट में पूरी तरह से डैमेज हो जाती हैं। उन गाड़ियों का बीमा कंपनी से पूरा पैसा लेकर गाड़ी को बीमा कंपनी को सौंप देते थे और बीमा कंपनी से साठगांठ कर कंपनी और मॉडल के अनुरूप चुराई गईं गाड़ियों में एसीएम, रजिस्ट्रेशन आदि प्राप्त कर स्थापित करा देते हैं। एसपी का कहना है कि गैंगलीडर और उसके साथी के अलावा पकड़े गए कोतवाली सदर के मोहल्ला गोटैय्याबाग निवासी इशरत अली उर्फ पप्पू, शास्त्रीनगर निवासी दिनेश शर्मा, कपूरथला घोसियाना निवासी सौरभ मेहरोत्रा उर्फ छोटू, श्रवण कुमार मेहरोत्रा, फॉरेस्ट कॉलोनी निवासी मोनू सिंह उर्फ मानवेंद्र सिंह और पलियाकलां के मोहल्ला पठान प्रथम निवासी सहवाज उर्फ शीबू खान के गैराज हैं।
एसपी बोलीं, अभी चल रही जांच
एसपी से सवाल किया गया कि प्रदेश स्तर तक पहुंच रखने वाले नेता कुछ लोगों और शहर के रसूखदार आढ़तियों के पास भी चोरी की कार बरामद हुई हैं। उनकी गाड़ियों पर पदनेम लगे स्टिकर और झंड़े पुलिस ने क्यों हटा दिए? चोरी की कार चलाने वाले क्या दोषी नहीं हैं? दोषी हैं तो उन्हें क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया? जिले के कद्दावर एक नेता के पास दो लग्जरी कार पुलिस ने ट्रेस कीं? आखिर वह कार कहां हैं? इन सभी सवालों को लेकर एसपी का एक ही बयान रहा कि यह सब बिंदु जांच के विषय हैं। सभी की जांच अभी चल रही है।
स्टिकर-झंडे हटाकर सवालों के घेरे में आई पुलिस
बरामद कई कारों पर नेताओं के पदनेम के स्टिकर और झंडे लगे थे। इन गाड़ियों को जब स्वॉट टीम लेकर पुलिस लाइन सभागार पहुंची तो वहीं पर पुलिस ने गाड़ियों पर लगे स्टिकर नोच डाले। झंड़े भी उखाड़ फेंके। इससे पुलिस की नीयत पर सवाल उठने लगे हैं।
रसूखदारों की कारों से गायब की नंबर प्लेट
स्वॉट टीम और थाना खीरी पुलिस का खेल स्टीकर और झंडे हटाने तक ही सीमित नहीं रहा। पुलिस ने शहर के एक आटोसेल्स शोरूम के स्वामी और गोला क्षेत्र के भाजपा नेता से बरामद एक डस्टर कार, दो स्वीफ्ट डीजार्व गाड़ियों से नंबर प्लेट भी हटा दी। इससे साफ है कि पुलिस ने रसूखदारों और सत्ता में दखल रखने वाले नेताओं को बचाने की पूरी कोशिश की।
एआरटीओ दफ्तर के कर्मचारियों की भी फंसेगी गर्दन
जिले में चल रहे कार चोरी के खेल में एआरटीओ विभाग और बीमा कंपनी की संलिप्तता भी उजागर हुई है। एसपी का कहना है कि एक्सीडेंटल गाड़ियां के मामले में बीमा कंपनी की जिम्मेदारी होती है कि वह उस गाड़ी का एसीएम और रजिस्ट्रेशन को एआरटीओ कार्यालय में जमा करें, लेकिन बीमाकर्मी गैंग के सदस्यों से साठगांठ कर ऐसा नहीं करते। इसमें एआरटीओ दफ्तर के कर्मचारियों की भी संलिप्तता प्रतीत हो रही है।
कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। अभी पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी लोग दोषी होंगे। उन्हें किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।
- पूनम, पुलिस अधीक्षक