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प्रिंसिपल बोलीं, यह नहीं थे पुलिस वर्दी पहने लुटेरे

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प्रिंसिपल बोलीं, यह नहीं
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थे पुलिस वर्दी पहने लुटेरे
पुलिस ने दो युवकों की फोटो प्रिंसिपल को दिखाई
- जीजीआईसी प्रिंसिपल से हुई लूटपाट का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
जीजीआईसी प्रिंसिपल के साथ हुई लूट के मामले की पुलिस ने जांच तेज कर दी है। तीन दिन पहले नीलाम हुई पुलिस लिखी एक बाइक कब्जे में लेने के बाद मंगलवार को पुलिस ने दो लोगों को कोतवाली बुलाकर पूछताछ की। दोनों के फोटो खींचकर प्रिंसिपल से शिनाख्त कराई, लेकिन प्रिंसिपल ने दोनों के घटना में शामिल होने से इंकार कर दिया।
बतादें कि 25 सितंबर को शहर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज (जीजीआईसी) की प्रधानाचार्य डॉ. शालिनी दुबे संस्कृत प्रवक्ता शशि तिवारी के साथ माध्यमिक एथलेटिक्स प्रतियोगिता के समापन में शामिल होने रिक्शे से लालपुर स्टेडियम जा रही थीं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंटर कॉलेज के पहले पुलिस वर्दी में बाइक से आए दो युवकों ने उनका रिक्शा रोक लिया था। रिक्शे वाले की पिटाई कर प्रिंसिपल को झांसे में लेकर चेन और अंगूठी निकलवा दी। फिर उनके बैग उलट दिए। प्रिंसिपल बैग में सामान रखने लगीं, इसी बीच दोनों लुटेरे चेन और अंगूठी लेकर गोला की ओर भाग गए थे।
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पुलिस ने दूसरे दिन घटना की रिपोर्ट चोरी में दर्ज की थी। तीन दिन पहले पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक बाइक रोकी थी। बाइक पर चालक, उसकी पत्नी और दो मासूम बच्चे सवार थे। पुलिस की सरकारी बाइक के कागज न होने पर पुलिस ने बाइक कब्जे में ले ली थी। हालांकि पूछताछ करने के बाद युवक को छोड़ दिया गया था। मंगलवार को पुलिस ने बाइक चालक और उसके ससुर को कोतवाली बुलाया। दोनों से अलग-अलग पूछताछ की। पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों के फोटो लिए और प्रिंसिपल को दिखाए। प्रिंसिपल ने फोटो देखकर दोनों के घटना में शामिल न होने की बात कही। इस पर पुलिस ने चालक को छोड़ दिया, जबकि उसके ससुर को अभी पुलिस ने हिरासत में ले रखा है।
सदर कोतवाल दीपक शुक्ल ने बताया कि बाइक चालक समेत दोनों युवकों की शिनाख्त कराई गई, लेकिन प्रिंसिपल ने दोनों को घटना में शामिल न होने की बात कही है। जिस पर चालक को छोड़ दिया गया है। बाइक स्वामी अभी पुलिस हिरासत में है।
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नीलाम हुईं पुलिस की गाड़ियों
के खरीददारों पर नजर
पुलिस उन बाइक स्वामियों की तलाश में जुटी है जिन्होंने हाल ही में पुलिस की नीलाम हुईं बाइक को खरीदा था। इनमें से अधिकांश लोगों ने बाइक से पुलिस शब्द नहीं हटाया और न ही बाइक अपने नाम ही दर्ज कर्राइं। पुलिस को शक है कि नीलाम हुईं गाड़ियों के खरीददारों में से कोई ऐसी हरकत कर सकता है।
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