मझगईं। करीब दस लाख रुपये के कर्ज में डूबे एक बुजुर्ग किसान की सदमे में मौत हो गई। मृतक किसान के पुत्र ने बैंक कर्मचारियों पर उसके पिता को परेशान करने का आरोप लगाया है। देर शाम किसी भी अधिकारी के न पहुंचने पर किसान का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। परिजनों के मुताबिक एसडीएम, लेखपाल व चौकी इंचार्ज को सूचना भी दी गई थी। लेकिन कोई नहीं पहुंचा।
कस्बा के मजरा तिकोना फार्म निवासी 65 वर्षीय किसान त्रिलोक सिंह की सोमवार सुबह छह बजे सदमे से मौत हो गई। मृतक के इकलौते पुत्र मनप्रीत सिंह ने बताया कि 12 वर्ष से वह ब्लड शुगर से पीड़ित थे। बताया कि उसके पिता ने 2006 में उप्र ग्राम्य विकास बैंक से एक लाख 92 हजार और पंजाब नेशनल बैंक से एक लाख 75 हजार व समिति से भी कर्जा लिया था। उसने बताया कि 15 दिन पूर्व उप्र ग्राम्य विकास बैंक के कर्मचारी ने घर आकर पिता को साढ़े पांच लाख का नोटिस दिया था। कर्ज अदा न कर पाने पर कुर्की की धमकी भी दी थी। आरोप है कि कर्मचारियों ने उसके पिता को जीप में बिठाकर ले जा रहे थे। रास्ते में उन लोगों ने कुर्की और जेल से बचने का रास्ता बताकर 15 हजार रुपये मांगे थे। करीब दस लाख के कर्ज के बोझ के तले दबे त्रिलोक सिंह उसी दिन से परेशान रहने लगे। तीन दिन पूर्व उसकी हालत खराब होने पर किसान को खुटार के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां डाक्टरों ने कई जांचें करने के बाद परिजनों को दिमागी टेंशन होने की बात बताई। वहां से आने के बाद सोमवार की सुबह छह बजे किसान की मौत हो गई। किसान की सदमे से हुई मौत की सूचना किसान के पुत्र ने एसडीएम, चौकी इंचार्ज व लेखपाल को दी, लेकिन किसी अधिकारी के न पहुंचने पर किसान का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक के पुत्र ने बताया कि उसकी मां की पहले ही मौत हो चुकी है। उधर इस बावत एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी ने बताया कि उन्हें दोपहर लगभग तीन बजे सूचना मिली थी जिसके बाद वह थोड़ा व्यस्त हो गए थे। कर्जे के बारे में बताया कि बैंक का कर्जा तो चुकाना ही पड़ेगा और बैंक जमीन बंधक बनाकर ही लोन देती है। परिजनों से मुलाकात कर उनसे जानकारी ली जाएगी। उधर, इस बाबत शाखा प्रबंधक अंकुर गुप्ता ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। बकाएदारों पर नोटिस जी की जा रही हैं, जो एक विभागीय कार्रवाई है।