लखीमपुर खीरी। योगी सरकार प्राइमरी स्कूलों को कॉन्वेंट की तर्ज पर विकसित करने की बात कह रही है, जो हकीकत से कोसो दूर है। जिले में दो-चार स्कूलों को छोड़कर अंग्रेजी माध्यम के सभी स्कूलों का हाल बुरा है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पास पूरी किताबें तक नहीं हैं। बच्चों को टाट-पट्टी पर बैठाकर पढ़ाई करवाई जा रही है। स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक तक नहीं हैं।
2018 में जिले में कुल 225 प्राइमरी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में तब्दील किया गया था। इनमें शुरुआत में एक बार अंग्रेजी की किताबें आईं थीं। 2020 से स्कूलों में अंग्रेजी की किताबें ही नहीं बंट पाईं। अधिकारियों का दावा है कि वर्तमान सत्र छोड़कर पूर्व के सभी सत्रों में किताबें मंगाई गई थीं और सभी ब्लॉक के बीआरसी पर भेजी गई थीं। लेकिन पड़ताल करने पर बीआरसी में इसका रिकॉर्ड नहीं मिला। मितौली ब्लॉक क्षेत्र में 15 स्कूल अंग्रेजी माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। इनमें तीन सालों से अंग्रेजी माध्यम की किताबें बच्चों को नहीं मिल सकी हैं।
प्राथमिक विद्यालय ओदरहा, जम्हौरा में अंग्रेजी माध्यम की कुछ किताबें पिछले वर्ष पहुंची थीं, लेकिन यहां अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने वाले शिक्षक न होने से हिंदी माध्यम की किताबों से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। मोहम्मदी के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अतीक खान ने बताया कि अभी शासन से ही पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं।
मामला सिर्फ किताबों तक ही सीमित नहीं है, अंग्रेजी माध्यम से बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की तैनाती भी नहीं हो पाई है। विभाग के मुताबिक पहले चरण में 75 स्कूलों में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन दूसरे चरण में इन शिक्षकों की चयन प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने पर चयन प्रक्रिया स्थगित कर दी गई। इसके बाद कोरोना काल के कारण इन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई। यही कारण है कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में बच्चों को हिंदी माध्यम से पढ़ाया जा रहा है और उसी अनुसार परीक्षा कराई जा रही है।
चालू सत्र में किताबों की अभी आपूर्ति नहीं हो पाई है। 150 स्कूलों में अंग्रेजी में पढ़ाने वाले शिक्षकों की तैनाती की जानी है। शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए