पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। मैलानी नानपारा रेल प्रखंड को बंद करने की खबर से यूं तो पूरे इलाके के लोग खफा हैं लेकिन आदिवासी थारू जनजाति के लोगों में इसको लेकर कुछ ज्यादा ही गुस्सा है। थारू जनजाति के लोग यूं तो पलिया में भी रहते हैं लेकिन उनकी तादाद यहां काफी कम है और उनकी सारी आबादी गौरीफंटा और चंदनचौकी इलाके में ही निवास करती है। दशकों पहले गौरीफंटा-चंदनचौकी तक ट्रेन चलती थीं लेकिन उनको कम आय के चलते बंद कर दिया गया। इसको लेकर थारू को खासी मायूसी हुई सालों वे प्राइवेट बसों से करीब 35 से 40 किलोमीटर दूरी तय कर पलिया आते रहे। इसके बाद जिसको जहां जाना होता था वह ट्रेन आदि से आगे की दूरी तय करता था लेकिन अब मैलानी से नानपारा ट्रेन रूट बंद करने की खबर मिली तो उनका सब्र टूट गया और वह आंदोलन पर भी उतारू हो गए। उनका मानना है कि गौरीफंटा और चंदनचौकी रेल मार्ग दशकों पहले बंद कर उनके इलाके के विकास के पहिये को पहले ही रोक दिया गया था अब पलिया नानपारा तक ट्रेन को बंद कर उनके आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक स्तर को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इससे उनकी तरक्की का सफर थम जाएगा। जिसके खिलाफ वह आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। इस संबंध में बुधवार को ट्रेन बंद होने से पड़ने वाले असर को लेकर आदिवासी समुदाय के लोगों से मुलाकात की गई और उनकी तकलीफ को जाना।