कुछेक स्कूलों को छोड़कर अधिकांश बच्चों के पास नहीं हैं अंग्रेजी माध्यम की किताबें
225 अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में सिर्फ 75 में ही इस माध्यम के शिक्षकों की है तैनाती
2018 में जिले के कुल 225 प्राथमिक स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में किया गया था तब्दील
लखीमपुर खीरी। योगी सरकार बेसिक के स्कूलों को कान्वेंट की तर्ज पर विकसित करने की बात कर रही है, लेकिन जिले में दो-चार स्कूलों को छोड़कर अंग्रेजी माध्यम के सभी स्कूलों का हाल बुरा है। न तो इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पास पूरी किताबें हैं और न ही इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक। वहीं, बच्चों को भी टाट-पट्टी पर बैठाकर पढ़ाई करवाई जा रही है। ऐसे में कांवेंट की तर्ज पर बेसिक के स्कूलों को विकसित करने की योजना कैसे परवान चढ़ेगी। हालांकि जिले के जिम्मेदार अधिकारी इसकी वजह कोरोना काल की बेबसी बता रहे हैं।
2018 में जनपद में कुल 225 प्राथमिक स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में तब्दील किया गया था, जिनमें शुरुआत में एक बार अंग्रेजी की किताबें आई थीं, जिसके बाद 2020 से स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की किताबें ही नहीं बंट पाई हैं। इन किताबों के आधा सत्र बीतने के बाद तक भी आने की उम्मीद नहीं दिख रही है। वहीं, विभागीय अधिकारियों का दावा है कि वर्तमान सत्र छोड़कर पूर्व के सभी सत्रों में किताबें मंगाई गई थीं और सभी ब्लॉकों के बीआरसी पर भेजी गई थीं, लेकिन पड़ताल में पता चला कि बीआरसी में इसका कई रिकॉर्ड नहीं है।
शिक्षकों के अभाव में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में होती है हिंदी में पढ़ाई
लखीमपुर खीरी। अंग्रेजी माध्यमों के स्कूलों में मसला सिर्फ किताबों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अंग्रेजी माध्यम से बच्चों को पढ़ाने के लिए इन स्कूलों में विशेषज्ञ शिक्षकों की तैनाती भी नहीं हो पाई है। विभाग के मुताबिक, पहले चरण में 75 स्कूलों में विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन दूसरे चरण में विशेषज्ञ शिक्षकों की चयन प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने पर चयन प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद कोरोना काल में विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो सकी है। इस कारण अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में बच्चों को हिंदी माध्यम से ही पढ़ाया जा रहा है और उसी अनुसार परीक्षा भी कराई जाती है। वहीं कान्वेंट स्कूलों की भांति इन स्कूलों में भी बच्चों को सुविधाएं देने का वादा सरकार ने किया था, लेकिन बच्चों को अभी भी टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
अंग्रेजी माध्यम की किताबों की उपलब्धता प्रति वर्ष कराई जाती है, लेकिन चालू सत्र में किताबों की अब तक आपूर्ति नहीं मिली है। 75 स्कूलों में विशेषज्ञ शिक्षकों की तैनाती किए जाने के बाद दूसरे चरण में चयन प्रक्रिया किन्हीं कारणों से स्थगित हो गई थी। करीब 150 स्कूलों में विशेषज्ञ शिक्षकों की तैनाती की जानी है। हालांकि नई भर्ती के तहत नियुक्त शिक्षक अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करा रहे हैं। शासन से दिशा-निर्देश मिलने के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। - लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए
न किताबें बंटीं न विशेषज्ञ शिक्षकों की हुई तैनाती
मितौली। ब्लॉक क्षेत्र में 15 स्कूल अंग्रेजी माध्यम से संचालित हैं। अंग्रेजी माध्यम से स्कूल संचालित करने का आदेश तो हो गया, लेकिन इनमें तीन सालों से अंग्रेजी माध्यम की किताबें बच्चों को नहीं मिल पा रही हैं। न ही अंग्रेजी माध्यम के अध्यापक हैं और न ही अन्य सुविधाएं मिल पा रही हैं।
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में संविलियन विद्यालय रतहरी, बिछिया नगरा, दतेली कला, चटौरा, उच्च प्राथमिक विद्यालय चुरईपुरवा, प्राथमिक विद्यालय ओसरी, कैमा, जम्हौरा, विशोखर, खानपुर ग्रंट, सेमरावॉ, संडिलवा, ओदरहा, सिरसा, कैमहरा शामिल है। कुछ स्कूलों में किताबें पहुंचीं, लेकिन विशेषज्ञ अध्यापक न होने की वजह से हिंदी माध्यम से पढ़ाई पूरी कराई गई। प्राथमिक विद्यालय ओदरहा, जम्हौरा में कुछ किताबें अंग्रेजी माध्यम पिछले वर्ष पहुंची थी, लेकिन अंग्रेजी माध्यम का शिक्षक न होने से हिंदी माध्यम की किताबों से बच्चों का शिक्षण कार्य कराया गया। इसके अलावा दतेलीकलां, चटौरा, विशोखर, सेमरावा, सिरसा में पिछले वर्षों में अंग्रेजी माध्यम की किताबें नहीं पहुंचीं। वहीं बीआरसी पर पुस्तकों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है कि किस स्कूल में कितनी किताबें भेजी गईं हैं। कुल मिलाकर मितौली ब्लॉक की शिक्षा व्यवस्था बदहाल है।
मोहम्मदी। क्षेत्र के गांव मियांपुर कालोनी, कैमहरा, गोकन समेत पांच स्कूल इंग्लिश मीडियम हैं, जिनमें अब तक इंग्लिश माध्यम की पुस्तकें नहीं उपलब्ध हो सकी हैं। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अतीक खान ने बताया कि अभी शासन से ही पुस्तकें नहीं मिली हैं। विभाग से किताबें मिलते ही बच्चों को उपलब्ध कराई जाएंगी। संवाद