जिला एवं महिला अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे 25 से 30 पीड़ित बच्चे
छह बच्चों को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर किया जा रहा है इलाज
लखीमपुर खीरी। सर्दी का असर दिन व दिन बढ़ रहा है। ऐसे में निमोनिया से लेकर कोल्ड डायरिया बच्चों के लिए मुसीबत बनने लगा है। जिला एवं महिला अस्पताल में रोजाना 25-30 इन रोगों से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मंगलवार को निमोनिया, कोल्ड डायरिया से पीड़ित चार बच्चे भर्ती हुए। वहीं बुखार पीड़ित दो बच्चों का इलाज चल रहा है। सभी बच्चों को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती किया गया है।
पिछले कुछ दिनों से निरंतर पारा गिर रहा है। इससे सुबह-शाम के अलावा दिन में भी ठंड होने लगी है, जो बच्चों पर भारी पड़ रही है। ठंड की वजह से बच्चे सर्दी, जुकाम, बुखार से लेकर निमोनिया एवं कोल्ड डायरिया की गिरफ्त में आ रहे हैं। इससे जिला एवं महिला अस्पताल की ओपीडी में 100 से ज्यादा बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 20 से 25 बच्चे निमोनिया एवं कोल्ड डायरिया से पीड़ित होते हैं।
निमोनिया की चपेट में आने पर हरिदासपुर निवासी तुफैल की नौ माह की पुत्री हुमा, राजगढ़ निवासी दुर्गेश की दस वर्षीय पुत्री पीहू एवं कोल्ड डायरिया पीड़ित अर्जुन पुरवा निवासी संदीप की दस वर्षीय पुत्री आराध्या, मितौली निवासी बाबूराम की 11 वर्षीय पुत्री राखी और बुखार पीड़ित मितौली निवासी हरीश चंद्र की आठ वर्षीय पुत्री आरोही, शिवकॉलोनी निवासी संदीप कश्यप के दो माह के पुत्र रितिक का चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
सर्दी का मौसम बच्चों के लिए बेहद खतरनाक
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजनी मिश्रा बताते हैं कि सर्दी का मौसम बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। जरा सी लापरवाही में बच्चे निमोनिया, कोल्ड डायरिया, सर्दी, जुकाम व बुखार की चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है। इसमें फेफड़ों में संक्रमण हो जाता, जिससे सूजन आ जाती है। कई बार पानी भी भर जाता है। पांच साल से छोटे बच्चों को इससे खतरा अधिक रहता है। शुरूआत में बच्चों को सर्दी एवं खांसी की समस्या होती है। समय पर ध्यान न देने पर बच्चे निमोनिया की गिरफ्त में आ जाते हैं।
इस तरह बरतें सावधानी
1. कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए बच्चों के हाथ धुलवाते रहें।
2. बच्चों की देखभाल के दौरान अपने हाथों की सफाई का भी ध्यान रखें।
3. शिशु को छह माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं।
4. बच्चों का नियमित टीकाकरण कराएं।
5. डॉक्टर की सलाह से भाप देना भी फायदेमंद रहता है।
6. छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को पौष्टिक आहार का कराएं सेवन।