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Lakhimpur Kheri News: धर्म-अध्यात्म और जंगल सफारी का केंद्र... लखीमपुर

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ओयल का प्राचीन मेंढक मंदिर  फाइल फोटो
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पर्यटन दिवस विशेष
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लखीमपुर खीरी। घूमने की योजना बना रहे हैं... तो लखीमपुर खीरी बेहतर विकल्प है। यहां धार्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक नजारे भी हैं। आप दुधवा नेशनल पार्क में जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकते हैं। बाघ, हाथी व अन्य वन्यजीवों के दीदार के साथ ही थारू समाज की जीवन शैली से भी रूबरू होने का मौका मिलेगा। थारू व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। सिंगाही के किले को भी देख सकते हैं.... पेश है जितेंद्र अवस्थी की रिपोर्ट।

शिव मंदिरों की रौनक से जिला जगमग

जिला मुख्यालय लखीमपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर गोला गोकर्णनाथ छोटी काशी के नाम से मशहूर है। यहां के शिव मंदिर में माथा टेकने देश के अनेेक हिस्सों से भक्त आते हैं।
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सावन में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। गोला में कई अन्य प्राचीन मंदिर भी हैं। गोला पहुंचने के लिए लखनऊ से सीधी ट्रेन और बस सेवा उपलब्ध है। वहीं ओयल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मेंढक मंदिर भी यहां स्थित है। यहां मेंढक के आकार पर स्थापित शिवलिंग का विशेष महत्व है। मंदिर गेट पर बना कुआं भी कई रहस्य समेटे है। इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुटती है। ओयल भी लखनऊ से सीधी रेल सेवा और बस मार्ग से जुड़ा है।
उधर शहर से करीब नौ किलोमीटर दूर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर लिलौटी नाथ भी जिले के पर्यटन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सावन में यहां भक्तों की भीड़ जुटती है। शहर से करीब 10 किमी दूर देवकली का शिवमंदिर भी आस्था का केंद्र हैं। मान्यता है कि यहां के तालाब की मिट्टी घर में रखने से सांप घर में नहीं आते। नाग पंचमी के दिन यहां विशेष पूजा होती है।


- यहां मिलेगा मीटरगेज ट्रेन के सफर का आनंद

जिले के मैलानी-पलिया रेलखंड पर मीटरगेज ट्रेन के सफर का आनंद लिया जा सकता है। इस रेल मार्ग पर अभी छोटी ट्रेन ही दौड़ रही है, यह मैलानी से पलिया होकर नानपारा जाती है। ट्रेन जंगल से भी होकर गुजरती है।




जिले की पर्यटन व्यवस्था का आधार है दुधवा नेशनल पार्क
दुधवा नेशनल पार्क जिले की पर्यटन व्यवस्था का आधार है। यहां सैलानियों को बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों के दीदार होते हैं। जंगल सफारी का लुत्फ उठाने के साथ थारू व्यंजनों का स्वाद भी चखा जा सकता है। दुधवा में ही किशनपुर सेंक्चुरी भी प्राकृतिक नजारों से भरा है। दुधवा पार्क में ही गैंडा पुनर्वासन योजना भी है। यहां गैंडों को भी देखा जा सकता है। झील, नदियां और अन्य नजारे आपको प्रकृति से जोड़ते हैं। दुधवा की लखनऊ से दूरी करीब 225 किमी है। लखीमपुर तक ट्रेन और बाद में बस व अन्य वाहनों से यहां पहुंचा सकता है।
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सई और सरायन नदी का उद्गम स्थल
लखीमपुर के पसगवां ब्लाॅक क्षेत्र मेंं सई नदी का उद्गम स्थल है। यहां से निकलकर नदी कई जिलों से गुजरती है। सरायन नदी का उद्गम स्थल भी जिले के बांकेगंज ब्लॉक की एक ग्राम सभा से है। उद्गम स्थल पर कई कार्य भी प्रस्तावित हैं। सरायन नदी जिले में करीब 90 किलाेमीटर की दूरी तय करती है। वहीं शारदा बैराज, शारदानगर का बालाजी मंदिर, धौरहरा की रामलोक वाटिका, गज मोचन मंदिर, टेढ़ेनाथ शिव मंदिर भी प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।
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कैसे पहुंचे लखीमपुर
लखनऊ से लखीमपुर की दूरी करीब 130 किमी है। लखनऊ से लखीमपुर के लिए सीधी ट्रेन है। बरेली से आने वालों को पीलीभीत से मैलानी और मैलानी से लखीमपुर की ट्रेन मिलेगी। लखनऊ, दिल्ली, बरेली और कई अन्य स्थानों के लिए लखीमपुर से सीधी बस सेवा है।

ओयल का प्राचीन मेंढक मंदिर  फाइल फोटो

ओयल का प्राचीन मेंढक मंदिर  फाइल फोटो

ओयल का प्राचीन मेंढक मंदिर  फाइल फोटो

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