लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के वानस्पतिक ढांचे पर फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ने शोध शुरू किया है। वानस्पतिक ढांचे में आ रहे बदलाव, रिजनरेशन की रफ्तार, घास के मैदानों की स्थिति, पेड़ों, झाड़ियों और लताओं की स्थिति पर यह शोध किया जा रहा है। वन विभाग का मानना है कि वानस्पतिक ढांचा अनुकूल होने पर ही वन्यजीवों की संवर्धन का प्रयास सफल हो सकता है। शोध के बाद सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) की टीम ने रविवार से वैज्ञानिक प्रवीण कुमार के नेतृत्व में शोध कार्य शुरू किया है। शोध टीम वनस्पतियों को सूचीबद्ध करने के साथ ही उनके बीजों का संग्रहण भी कर रही है। इन बीजों का प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाएगा। अभी यह शोध कार्य दुधवा नेशनल पार्क में चल रहा है। बाद में दुधवा टाइगर रिजर्व की अन्य डिवीजनों जैसे कर्तनियाघाट और बफर जोन में भी किया जाएगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व में 67 फीसदी साल के जंगल हैँ। जबकि 33 फीसदी जामुन, सेमल आदि के पेड़ हैं। घास के मैदानों में विभिन्न प्रजातियों की घासें भी पाई जाती हैं, जो शाकाहारी जीवों को भोजन उपलब्ध कराती हैं। घास के मैदानों में कुछ ऐसी भी घासें और वनस्पतियां हैं, जो अनुपयोगी मानी जाती हैं। इन्हें जानवर खाना पसंद नहीं करते। इन हानिकारक घासों का विस्तार तेजी से होता है और ये उपयोगी घासों के विस्तार को रोक देती हैं।
बाढ़ से बदल रही दुधवा की वानस्पतिक स्थिति
दुधवा टाइगर रिजर्व के पूर्व निदेशक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी संजय पाठक बताते हैं कि नेपाली नदियों से दुधवा में आने वाली बाढ़ से दुधवा का वानस्पतिक ढांचा बदल रहा है। जंगल में लंबे अरसे तक बाढ़ का पानी भरा रहने से घास के मैदानों से घासें कम हो रही हैं। उनकी जगह दूसरी वनस्पतियां उग रही हैं। जहां-जहां जलभराव होता है, वहां पानी सूखने के बाद जामुन, गुटैल आदि के जंगल खड़े हो रहे हैं। पारिस्थितिकी में बदलाव से वन्यजीव जंगल से बाहर निकल रहे हैं। एफआरआई की टीम इस दिशा में विस्तार से शोध करेगी।
वानस्पतिक ढांचा बदलने से वन्यजीवों पर असर
टाइगर रिजर्व की पारिस्थितिकी में बदलाव।
जंगल की जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा रहा है।
वन्यजीवों की खाद्य शृंखला पर असर पड़ रहा है।
घास के मैदान कम होने से शाकाहारी पशुओं के लिए चारे की समस्या पैदा हो रही है।
पारिस्थितिकी में बदलाव से वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलने की प्रवृत्ति बढ़ी।
दुधवा टाइगर रिजर्व में
66 प्रतिशत है वुडलैंड
21 प्रतिशत है घास का मैदान
13 प्रतिशत है वेटलैंड
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ने दुधवा टाइगर रिजर्व में पेड़ पौधों और वनस्पतियों पर शोध शुरू किया है। शोध का मकसद वन्यजीवों के संवर्धन के लिए दुधवा के वानस्पतिक ढांचे को अनुकूल बनाना है।
- डॉ. रंगाराजू टी. उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व