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बोकरिया घाट हादसा : सेल्फी ली, रील बनाई... और चंद मिनट बाद गूंजने लगीं चीखें

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रोले बिलखते परिवार को लोग। संवाद
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निघासन। शनिवार रात से शुरू हुआ तेलियार गांव की टिया उर्फ उर्वशी के जन्मदिन का जश्न जीवन भर का दर्द दे गया। रात में पार्टी करने के बाद रविवार सुबह परिवार के नौ लोग बोकरिया घाट पर पिकनिक मनाने आए थे। साथ में कोल्ड ड्रिंक्स, चिप्स और बिरयानी भी लाए थे। सभी ने घाट पर सेल्फी ली, रील बनाई और घाघरा नदी में नहाने लगे। इसी दौरान एक-एक कर परिवार के चार लोगों की डूबकर मौत हो गई। चंद मिनटों में ही हंसी के ठहाकों की जगह चीत्कारों ने ले ली और माहौल मातमी हो गया।
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एक ही गाड़ी में नौ लोग बैठकर नदी के पास पिकनिक मानने गए थे। कान्हा छोटा होने के कारण सत्यम की गोद में बैठकर गया था। नैनी अपनी बुआ सुशीला के पास आगे बैठी थी। गाड़ी से उतरने के बाद बच्चे घाट पर खेलने लगे। उसके बाद नहाने के लिए नदी में चले गए। कान्हा जब डूबने लगा तो उसे बचाने के लिए सुशीला आई, उसके बाद सत्यम आ गया और फिर उर्वशी और बाद में नैनी पहुंच गई। किनारे पर खड़ी सत्यम की मां बबिता और बहन रिचा देख रही थी। उन लोगों ने जोर से चिल्लाना शुरू किया। आसपास के किसान और मछुआरे दौड़कर आए। सभी लोगों नदी से बाहर निकाला, लेकिन सुशीला देवी, टिया उर्फ उर्वशी, सत्यम और कान्हा की सांसें थम चुकी थीं।



खेल-खेल में गई जान

कान्हा सबसे कम उम्र का था। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो नदी में नहाने के दौरान सभी पानी से खेल रहे थे। पानी में खड़े कान्हा के कपड़ों को सभी लोग इधर उधर फेंक रहे थे। कान्हा अपने कपड़ों को उठाने के लिए जाता था। इसी दौरान कपड़ों को उठाने के चक्कर में कान्हा गहरे पानी में चला गया। कान्हा को डूबते हुए देखकर अन्य लोग उसे बचाने के लिए गहरे पानी में चले गए और बारी-बारी से डूबते गए।
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दो घंटे सीएचसी में रही अफरा-तफरी
नदी से निकाले गए लोगों को तत्काल रमियाबेहड़ सीएचसी लाया गया। यहां डाक्टरों ने चार को मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजनों में चीख-पुकार मच गई। चीत्कार के उस मंजर को देख हर किसी का कलेजा कांप उठा। घर की महिलाएं अपने बच्चों के सिर गोदी में रखकर विलाप कर रही थीं। करीब दो घंटे तक सीएचसी में अफरा-तफरी जैसा माहौल रहा। एसडीएम निघासन अश्विनी कुमार सिंह, नायब तहसीलदार धौरहरा वीरेंद्र कुमार यादव और थानाध्यक्ष पढ़ुआ हरिकेश राय वहां मौजूद रहे।




60 फिट गहरा कुंड ले चुका है कई जानें, सुरक्षा के इंतजाम नहीं

निघासन। घाघरा नदी के बोकरिहा घाट पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। बड़ी संख्या में लोग यहां पिकनिक मनाने पहुंचते हैं। इस घाट में करीब 60 फिट गहरा कुंड भी है, जो कई जानें ले चुका हैं। एक गोताखोर भी डूबते बचा था। कई मौतें होने के बाद भी घाट पर पुलिस-प्रशासनिक अफसरों ने न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया और न ही रस्सी बांधी। इसी लापरवाही की वजह से सोमवार को फिर हादसा हो गया।
वर्ष 2018 में इसी घाट पर भैंस को पानी पिलाते समय बोकरिहा निवासी मोती सिंह की मौत हो गई थी। 2020 में मूर्ति विसर्जन के दौरान 18 साल के पिंटू चक्रवर्ती की डूबने से मौत हुई थी। डेढ़ साल पहले इसी गांव के रमेश धोबी की भी जान गई थी। सोमवार को सत्यम, कान्हा, उर्वशी और सुशीला की मौत हो गई।
बोकरिहा गांव के गोताखोर भल्ला यादव ने बताया कि जहां पर यह हादसा हुआ है, वहां बहुत गहरा कुंड है। वह तैरते हुए वहां तक पहुंचे तो डूबते हुए बचे थे। उन्होंने बताया कि उस कुंड की गहराई लगभग 60 फिट से भी अधिक है। प्रशासन यदि वहां पर कोई चेतावनी बोर्ड लगाए तो हादसों को रोका जा सकता है। बड़ा हादसा होने के बाद भी प्रशासन ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया है, जिससे लोगों को नहाने के दौरान डूबने से बचाया जा सके। संवाद

रोले बिलखते परिवार को लोग। संवाद

रोले बिलखते परिवार को लोग। संवाद

रोले बिलखते परिवार को लोग। संवाद

रोले बिलखते परिवार को लोग। संवाद

रोले बिलखते परिवार को लोग। संवाद

रोले बिलखते परिवार को लोग। संवाद

रोले बिलखते परिवार को लोग। संवाद

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