लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट लगनी है। इसकी मशीनें भी आ गई हैं, लेकिन लाइसेंस न मिलने से यूनिट की शुरूआत नहीं हो पा रही है। मरीजों को प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आदि की जरूरत पड़ने पर तीमारदार लखनऊ की दौड़ लगाने के लिए मजबूर होते हैं। सूत्र बताते हैं कि लाइसेंस मिलने में जगह का पेंच फंसा है, जबकि ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि रिपोर्ट भेज दी गई है। बस दिल्ली से अनुमति मिलना बाकी है।
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की ही सुविधा है। ब्लड सेपरेटर यूनिट लगने से एक यूनिट से चार लोगों की जरूरत पूरी होगी। मशीन द्वारा प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी व क्रॉयो प्रेसीपिटेट कंपोनेंट का अलग कर उपयोग किया जा सकेगा। मंजूरी मिलने के बाद टीम ने महीने भर पहले ब्लड बैंक का निरीक्षण कर शासन की ओर से निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार रिपोर्ट तैयार की। हालांकि एक माह का समय बीत जाने के बावजूद अभी तक यूनिट लगाने लाइसेंस नहीं मिल सका है, जबकि मशीनें आ चुकी हैं।
थैलेसीमिया, डेंगू मरीजों को मिलेगा लाभ
ब्लड सेपरेटर यूनिट शुरू होने से सबसे ज्यादा डेंगू, थैलेसीमिया के मरीजों को लाभ मिलेगा। डेंगू के मरीजों को प्लेट्सलेट की आवश्यकता होती है। थैलेसीमिया के मरीजों सहित आग से जले, मलेरिया या चिकनगुनिया के बिगड़े केस में मरीजों को अलग-अलग ब्लड कंपोनेंट की आवश्यकता होती है। मशीन चालू होने से मरीजों को यह सुविधा मिलने लगेगी।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड सेपेरेटर यूनिट लगनी है। इस संबंध में निरीक्षण रिपोर्ट प्रदेश से लेकर दिल्ली तक भेजी जा चुकी है। उम्मीद है कि इसी माह यूनिट लगाने के लिए लाइसेंस मिल जाएगा।
- सुनील रावत, जिला औषधि निरीक्षक