लखीमपुर खीरी। मधुमक्खी पालन कर शहद का कारोबार करने वाले किसान मायूस हैं। उनको बाजार में अच्छा भाव नहीं मिल पा रहा। किसान औने-पौने दामों पर शहद बेचने को मजबूर हैं। हालांकि विभाग से मिलने वाली सब्सिडी से कुछ राहत है। किसानों ने कहा, मधुमक्खी पालन का कारोबार काफी अच्छा है, लेकिन मेहनत के हिसाब से मुनाफा नहीं हो रहा।
विभिन्न फसलों की खेती-बाड़ी के साथ ही जनपद के काफी किसान मधुमक्खी पालन करते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मधुमक्खी पालन की सुविधा है। किसानों को 40 फीसदी तक सब्सिडी दिए जाने की व्यवस्था है। 2.20 लाख के प्रोजेक्ट पर 88 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है।
धौरहरा क्षेत्र के ऐरा निवासी किसान शिशुपाल ने बताया कि 2.20 लाख की लागत से मधुमक्खी पालन शुरू किया था। 100 बॉक्स लगाए हैं। एक बॉक्स से 10 किलो तक शहद निकलता है। शहद की काफी अच्छी पैदावार हुई। लोकल मार्केट में उतना भाव नहीं मिल रहा। ऐसे में उन्नाव, गोसाइगंज आदि लेकर गए थे। वहां थोड़े अधिक रेट मिले, लेकिन ज्यादा फायदा नहीं हो सका। ऑफ सीजन में मधुमक्खी को चीनी का घोल खिलाना पड़ता है। विभाग से 88 हजार रुपये का सब्सिडी मिलने से कुछ राहत थी।
तीन सालों में बढ़ा लक्ष्य तो बढ़ी किसानों की संख्या
जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले तीन सालों में शहद कारोबार के लिए सब्सिडी योजना का लक्ष्य बढ़ा है। लक्ष्य बढ़ने के साथ ही किसानों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2021-22 में मात्र दो किसानों को योजना का लाभ दिया गया था, लेकिन वर्ष 2023 में 10 और 2024 में 10 किसानों को लाभ दिए जाने का लक्ष्य बढ़ा है। इस वर्ष का अभी लक्ष्य नहीं आया है, लेकिन आवेदन 25 से अधिक आ चुके हैं।
वर्ष-2022 में सब्सिडी लेकर शुरू किया था कारोबार
मधुमक्खी पालन काफी अच्छा व्यवसाय है। वर्ष 2022 में सब्सिडी लेकर शहद का कारोबार शुरू किया था। काफी अच्छा काम चल रहा है, लेकिन मौजूदा समय में रेट कम मिल रहे हैं। वह सरसों के फूल व यूकेलिप्टस के फूलों के रस का मधुमक्खियों द्वारा तैयार शुद्ध शहद का कारोबार करते हैं। - जितेंद्र सिंह, लंदनपुर ग्रांट झाऊपुर
तीन साल पहले हुआ था अच्छा फायदा
एक सीजन में 25 क्विंटल शहद का उत्पादन करते है। कारोबार तो काफी अच्छा है, लेकिन रेट नहीं मिल पा रहा है। शहद का भाव घटता-बढ़ता रहता है। तीन साल पहले काफी अच्छा भाव मिला था। फिल्टर शहद 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है, जबकि बिना फिल्टर 100 से 150 तक ही रहता है। -श्रीप्रकाश मौर्या, महमदपुर कफारा
अब तक मधुमक्खी पालन पर जोर था, इस कारण तीन सालों में इसका कारोबार बढ़ा है। अब मार्केट में बिक्री को लेकर भी प्लानिंग की जा रही है, ताकि किसानों को शहद से अच्छा लाभ हो सके। मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को 40 फीसदी तक सब्सिडी दिए जाने की व्यवस्था है। -मृत्युंजय सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
जितेन्द्र सिंह