मोहर्रम की तैयारी में मजलिस मातम के लिए इमामबाड़े को सजाते हुए लोग। संवाद
खीरी टाउन। रविवार को मोहर्रम का चांद दिखने के बाद इमामबाड़ों में मजलिसों के लिए फरशे अज़ा और ताजिए रखने की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। कस्बे में जुलूस और मजलिसों को लेकर अंजुमनों ने तैयारी तेज कर दी हैं।
सोमवार को इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, मोहर्रम की पहली तारीख हो गई। शिया और सुन्नी इमामबाड़ों में सफाई और रंगाई-पुताई का काम पूरा हो गया है। शिया वक्फ इमामबाड़े के मुतवल्ली रईस मिर्जा ने रंगाई पुताई का कार्य संपन्न कराया। उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी परंपरागत तरीके से मोहर्रम मनाया जाएगा। मोहर्रम की पहली तारीख से बारह मोहर्रम तक जुलूसों मातम का सिलसिला चलता है।
अंजुमन हुसैनिया के बाबर हुसैन और अंजुमन गुलामाने हुसैन के अब्बन जैदी ने बताया कि मोहर्रम की आठवीं का जुलूस मोहल्ला सेखसराए के सुन्नी इमामबाड़े से उठ कर मुगली टोला स्थित शिया वक्फ इमामबाड़े में सम्पन्न होता है। अंजुमन इस्लामिया के सेक्रेटरी सईद खान एडवोकेट ने बताया कि मोहर्रमदारी के कार्यक्रम का खाका तैयार हो गया है। उसी के अनुसार तैयारी की जाए। फिलहाल चांद दिखने के बाद शिया समुदायों में गमी का माहौल पैदा हो गया है। कर्बला में इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ जो शहादत दी थी। उसी की याद में मजलिसों मातम का सिलसिला शुरू हो गया है। इमाम हुसैन के गम का इजहार करते हुए लोगों ने अपने घरों पर काले झंडे लगा दिए हैं।