लखीमपुर खीरी। पांच साल की बच्ची अंशु की हत्या में शक के दायरे में आए गांव के पकरिया जलालपुर के आशाराम की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद अंशु हत्याकांड को पुलिस भूल गई है। अब तक इस केस में पुलिस कोई प्रगति नहीं कर पाई है।
तीन अप्रैल को थाना मितौली क्षेत्र के पकरिया जलालपुर निवासी अनूप की पांच वर्षीय पुत्री की गला दबाकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अंशु के परिजनों ने गांव के ही आशाराम पर शक जाहिर किया था। पुलिस आशाराम को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद आशाराम के परिजनों ने पुलिस पिटाई से उसकी मौत होने की बात कही और शव सड़क पर रखकर मार्ग जाम कर दिया था।
हालांकि कई घंटों की मशक्कत के बाद आखिरकार परिजन मान गए थे। पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए भेजा गया था। मामले में मृतक आशाराम के बेटे रोहित कुमार की तहरीर पर पिपरझला चौकी इंचार्ज नाम अज्ञात व मुख्य आरक्षी बृजपाल के खिलाफ धारा हत्या व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
करीब डेढ़ महीने का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो अंशु के हत्यारों को ढूंढ़ पाई है और न ही आशाराम की मौत में नामजद आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकी है। मामले की जांच सीओ मितौली शमशेर बहादुर सिंह कर रहे हैं।
-
मामले की जांच चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या का कारण साफ न होने की वजह से विसरा सुरक्षित कराया गया था। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे कोई कार्रवाई की जाएगी।
शमशेर बहादुर सिंह, सीओ मितौली