बांकेगंज। पितृपक्ष की शुरूआत इस बार बुधवार से हो रही है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के अगले दिन से शुरू होने वाला पितृपक्ष दो अक्टूबर तक चलेगा। पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
छोटी काशी गोला के ज्योतिषाचार्य पंडित रामदेव मिश्र शास्त्री के अनुसार, श्राद्ध में तीन पीढि़यों तक पितरों को तर्पण और पिंडदान देने का विधान है। तर्पण और पिंडदान पितरों की पुण्य (मृत) तिथि पर दिया जाता है। श्राद्ध में तर्पण के जरिए ही पितरों का ऋण चुकाया जा सकता है। इससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर साल पितृ पक्ष में पूर्वज पितृ लोक से धरती लोक पर आते हैं। श्राद्ध मिलने पर प्रसन्न होते हैं। इसलिए पितरों की पूजा, तर्पण के कार्य, श्राद्ध पितृ पक्ष में बेहद उत्तम माने जाते हैं। बताया कि पितृ पक्ष यानी पूर्वज श्राद्ध में गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी या देवताओं के रूप में आकर भोजन ग्रहण करते हैं। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान भोजन के पांच अंश निकालने का विधान है।
ऐसे करें पितरों का श्राद्ध
आचार्य ने बताया कि पितराें की शांति के लिए श्रद्धा भाव से श्राद्ध तिथि पर सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए। पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध और दान का संकल्प लें। मूल रूप से श्राद्ध के दिन भूखे रहकर सात्विक भोजन तैयार करें। गोग्रास, पंच ग्रास आदि अलग रखकर थाली में भोजन परोसकर मृत परिजन के चित्र के सामने परोसें। हाथ जोड़कर उनसे दया दृष्टि करते हुए पधारने और भोजन ग्रहण करने की प्रार्थना करें।