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Lakhimpur Kheri News: फ्लॉप साबित हो रहे हैं जिले के पांचों इको टूरिज्म सर्किट

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बीते 20 दिनों में एक भी सैलानी ने दर्ज नहीं कराई आमद
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अधिकारी बोले, प्रचार-प्रसार में कमी है इसका मुख्य कारण
बांकेगंज। जिले में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की भीरा और मैलानी रेंज में तीन और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला और मोहम्मदी रेंज में बनाए गए दो टूरिस्ट सर्किट फ्लॉप साबित हो रहे हैं। कारण, पर्यटन सत्र शुरू हुए 20 दिन बीत चुके हैं, बावजूद इसके यहां एक भी सैलानी नहीं पहुंचा है। महंगाई और सुविधाओं में कमी भी इसकी वजह हो सकती है। हालांकि अधिकारी प्रचार-प्रसार में कमी इसका मुख्य कारण बता रहे हैं।
इको टूरिज्म सर्किट विकसित करने के पीछे दुधवा प्रशासन का उद्देश्य दुधवा टाइगर रिजर्व के कोरजोन से पर्यटकों का भार घटना था। वहीं इस सत्र में दुधवा टाइगर रिजर्व में सैलानियों की संख्या कम जरूर हुई, लेकिन इको टूरिज्म सर्किट सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सके। यहां बता दें कि दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के तीनों नए टूरिस्ट सर्किटों पर दुधवा की ही पर्यटन दरें लागू हैं, जबकि यहां दुधवा नेशनल पार्क जैसी कोई सुविधाएं नहीं। मसलन, न यहां अच्छे पर्यटक आवास हैं, न ही कैंटीन की सुविधा। दुधवा जैसा पर्यटन का माहौल भी नहीं है। ऐसे में सैलानी यहां आने से कतरा रहे हैं। स्थानीय सैलानी भी अधिक पर्यटन दरों के कारण यहां नहीं आ रहे हैं।
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वहीं दक्षिण खीरी वन प्रभाग के दोनों टूरिस्ट सर्किट काफी बड़े हिस्से में हैं। खामी यह है कि उसका बड़ा हिस्सा जंगल के बजाए खुले मैदान में है। वहां भी न ठहरने की व्यवस्था है, न ही कैंटीन की। खुला मैदान होने के कारण वहीं कोई आकर्षण भी नहीं है। केवल भ्रमण कराने के लिए प्रति व्यक्ति 1200 रुपये जिप्सी का किराया निर्धारित है, जो काफी ज्यादा है। ऐसे में दक्षिण खीरी वन प्रभाग में भी अब तक एक भी बुकिंग नहीं हुई है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन में इको टूरिज्म के लिए तीन टूरिस्ट सर्किट बनाए गए हैं। इन्हें प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया है। अभी सैलानियों को इनके संबंध में बहुत अधिक जानकारी नहीं है। धीरे-धीरे सैलानी आकर्षित होंगे तो वहां दुधवा पार्क से भी ज्यादा भीड़ नजर आएगी।
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- संजय पाठक, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी और गोला रेंज में इको टूरिज्म की शुरूआत तो हो गई है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में अभी सैलानी नहीं आ रहे हैं। जल्दी ही यहां भी सैलानियों का आकर्षण बढ़ेगा और हमारा उद्देश्य भी पूरा होगा।
- संजय बिस्वाल, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग
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