लखीमपुर खीरी। जिले में लक्ष्य के सापेक्ष गेहूं खरीद नहीं हो सकी। मंडी सचिव से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों तक की मेहनत बेकार हो गई। इस बार 1.88 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लक्ष्य के सापेक्ष 16.78 प्रतिशत ही खरीद हो सकी।
इस बार एक मार्च से गेहूं खरीद शुरू हुई थी। शुरू में एक महीने तक केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा। अप्रैल के पहले सप्ताह से गेहूं की आवक होने पर मंडियां गुलजार होने लगी थीं। नकद भुगतान को लेकर किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों के बजाय आढ़तों पर अधिक फसल बेची। 1.88 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लक्ष्य को पूरा करने के लिए डीएम सहित जिला स्तरीय अधिकारियों ने दिन-रात एक कर दी। यहां तक की मंडी में आने वाले किसानों को आढ़तों पर जाने से भी रोका गया। विरोध के बाद मंडी में आढ़तों पर आने वाले किसानों का 60 प्रतिशत गेहूं क्रय केंद्रों पर देने की सहमति बनी। इसके बावजूद लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका। ढाई महीने चली खरीद के बाद 31,549 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। हालांकि मंडल में सर्वाधिक खरीद पर जिले को पहला स्थान मिला है।
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बाजार मूल्य ज्यादा होने से पीछे छूटा लक्ष्य
इस बार जिले में 156 सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों के प्रभारियों ने भी किसानों को जागरूक कर क्रय केंद्रों पर ही फसल बेचने के लिए प्रेरित किया। इस बार समर्थन मूल्य 2275 रुपये निर्धारित किया गया था। हालांकि बाजार और आढ़तों पर 2280 से लेकर 2300 रुपये तक फसल खरीदी गई। किसानों ने नकद और ज्यादा धनराशि के चक्कर में अपनी फसलें बाजारों में बेंच दी। इस वजह से जिला लक्ष्य से पीछे छूट गया।
कई बार खरीद बढ़ाने का किया प्रयास, फिर भी लक्ष्य से दूर
चार अप्रैल को मंडी में किसानों की गेहूं भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रय केंद्रों पर खड़ी करा ली गई थी। किसानों का आरोप था कि मंडी सचिव ने आढ़तों पर तौल कराने की बजाय सरकारी केंद्रों पर ही तौल कराने की बात कही थी। आढ़तों पर गेहूं तौलवाने पर गेट पास न देने, आढ़तियों का लाइसेंस निरस्त करने की भी धमकी दी थी। हालांकि मंडी सचिव सुधांशु ने इस तरह की बात कहे जाने से इन्कार किया था। इतना सब होने के बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।
वर्जन
बाजार मूल्य अधिक होने की वजह से लक्ष्य के सापेक्ष खरीद नहीं की जा सकी। हालांकि प्रयास पूरा किया गया कि आढ़तों पर फसल न तुले, लेकिन किसान स्वतंत्र हैं।
संतोष पटेल, डिप्टी आरएमओ