बांकेगंज। नेपाल के शुक्ला फाटा नेशनल पार्क से निकलकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व होते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व और दक्षिण खीरी वन प्रभाग में पहुंचे जंगली हाथियों के दल ने दो सौ दिन का लंबा प्रवास गुजारने के बाद वतन वापसी के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। इन दिनों इन हाथियों की लोकेशन पीटीआर में मिल रही है। यहां से यह संपूर्णानगर रेंज होते हुए नेपाल सीमा में प्रवेश करेंगे।
नेपाल के शुक्ला फाटा नेशनल पार्क से 19 जुलाई 2022 को हाथियों का एक दल संपूर्णानगर रेंज और पीटीआर होते हुए दुधवा नेशनल पार्क की किशनपुर सेंक्चुरी पहुंचा था। यहां कुछ दिन रहने के बाद ये हाथी दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी रेंज में जा पहुंचे। जहां इन हाथियों ने करीब छह महीने प्रवास किया। इस दौरान आसपास के खेतों में जमकर उत्पात मचाया और फसलों को तबाह कर दिया। अगले महीने अगस्त माह में हाथियों के एक और झुंड ने नेपाल से आकर यहां डेरा डाल दिया। इन दोनों झुंड में कुल मिलाकर करीब 63 हाथी थे। खदेड़ने के तमाम प्रयासों के बावजूद हाथी टस से मस नहीं हो रहे थे।
दो माह पहले इन हाथियों में से करीब 40 हाथियों का एक बड़ा दल गुपचुप ढंग से नेपाल वापस चला गया। 23 हाथी अभी तक दक्षिण खीरी वन प्रभाग में डेरा डाले थे। पिछले एक सप्ताह से इन हाथियों ने भी अपनी रवानगी शुरू की। दक्षिण खीरी वन प्रभाग से गोला-खुटार हाईवे पारकर मड़हा जंगल और भीरा रेंज होते हुए बुधवार रात पीटीआर की हरीपुर रेंज जा पहुंचे। अब यह संपूर्णानगर होते हुए नेपाल जा सकते हैं।
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प्रचलित कॉरिडोर से ही आए और गए हाथी
नेपाल के हाथी जिस रास्ते से आए थे, उसी रास्ते से अपनी वापसी कर रहे हैं। इससे पहले कुछ वर्षो में भी हाथी इन्हीं रास्तों से आते-जाते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी अपने कॉरिडोर को कभी नहीं छोड़ते।
इस बार किया सबसे लंबा प्रवास
पिछले बीस वर्षों के इतिहास में इस बार जिले में नेपाली हाथियों का प्रवास सबसे ज्यादा लंबा रहा। हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे थे कि संभवत: यह हाथी वापस न जाकर यहीं बसेरा बनाएंगे लेकिन खेतों में गन्ने की फसल कम होने के साथ ही उन्होंने वापसी का रुख कर लिया। इससे वन विभाग और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
नेपाल से छह माह पहले आए जंगली हाथी नेपाल की ओर वापसी कर रहे हैं। इस समय उनकी लोकेशन पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मिली है। जल्दी ही वे अपने प्रचलित कॉरिडोर से नेपाल पहुंच जाएंगे। बावजूद इसके लगातार निगरानी की जा रही है।
- बी प्रभाकर, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व