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आंसुओं भरी आंखें और बेबस चेहरे... धौरहरा में गम का माहौल

सार

ऐरा शारदा पुल पर मिनी ट्रक और निजी बस में हुई भिड़ंत में धौरहरा कस्बे के ही छह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।परिवार वालों के सामने जितेंद्र का हंसता चेहरा घूम रहा है।
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विस्तार
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धौरहरा। ऐरा शारदा पुल पर मिनी ट्रक और निजी बस में हुई भिड़ंत में धौरहरा कस्बे के ही छह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। पोस्टमार्टम के बाद जब शव कस्बे में पहुंचे तो कोहराम मच गया। पूरे धौरहरा कस्बे में बृहस्पतिवार को भी मातमी सन्नाटा पसरा रहा। लोग मृतकों के घर जाकर परिवार वालों को ढांढस बंधा रहे हैं। किसी ने अपने परिवार का मुखिया खोया तो किसी ने अपने लाड़ले को। किसी ने मां को खोया तो किसी ने बेटे को। पूरे कस्बे में गम का माहौल है। लोगों की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे हैं।
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अब कौन पालेगा सुरेंद्र का परिवार
मृतक सुरेंद्र चौरसिया अपने परिवार के एकलौते कमाऊ सदस्य थे। वह अपने माता-पिता की दूसरी संतान थे। वह मौजूदा समय में लखीमपुर स्थित सैनिक अस्पताल में संविदा कर्मी थे। खाली समय में वह ऑटो रिक्शा भी चलाया करते थे। इससे होने वाली आमदनी से उनका परिवार चलता था। काम के सिलसिले में ही वह लखीमपुर जा रहे थे। अब उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव कस्बे में पहुंचा तो बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल था। बुधवार को ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अंतिम समय आर्या को देख भी नहीं पाए माता-पिता
कस्बा के रामबटी मोहल्ला निवासी हरे गोविंद की सात साल की बेटी आर्या निगम उर्फ श्रद्घा की दादी ने बताया कि वह अपनी मां आरती, पिता हरगोविंद और चार साल के छोटे भाई के साथ मां की मौसी के घर होने वाले एक धार्मिक आयोजन में शामिल होने लखनऊ जा रही थी। आर्या कक्षा दो की छात्रा थी, रामबट्टी प्राथमिक पाठशाला में पढ़ती थी। दादी ने बताया कि घटना के बाद से किसी के मुंह में एक निवाला तक नहीं गया है। हादसे में आर्या की मां आरती और पिता भी घायल हुए हैं। आरती जिला अस्पताल में तो पिता लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं। वह आखिरी बार आर्या को देख भी नहीं पाए। अंतिम संस्कार उसके मामा ने किया।
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इलाज कराने का भी मौका नहीं मिला, चली गई जान
कस्बा के मोहल्ला वनघुसरी निवासी अकील अहमद की पत्नी 55 वर्षीय अजीमुन का शव का भी बुधवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था। परिवार वालों ने बताया कि अजीमुन अपना इलाज कराने के लिए लखनऊ जा रही थीं। छोटे पुत्र ने बताया कि अजीमुन के पेट में पथरी थी। ऑपरेशन होना था। उनकी मौत से परिवार में मातम पसरा है। मोहल्ले में भी लोग गमजदा हैं और एक दूसरे को सांत्वना दे रहे हैं।
कम उम्र में मजदूरी करने के लिए मजबूर था मन्नू
हादसे में मारा गया 15 वर्षीय मन्नू मिश्रा घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मन्नू को भी इस छोटी उम्र में भी मेहनत मजदूरी करनी पड़ रही थी। वह मजदूरी के सिलसिले में ही लखनऊ जा रहा था। उसका परिवार नगर पंचायत धौरहरा की बनी पुरानी बिल्डिंग में रहकर गुजारा करता है। इन लोगों के पास ना तो कोई घर है ना ही खेती के लिए जमीन है। मन्नू के परिवार में आज भी चूल्हा नहीं जला है।
सगीर के बीमार पिता की अब कौन करेगा देखभाल
धौरहरा के बाजार वार्ड निवासी 45 वर्षीय सगीर का अंतिम संस्कार भी बुधवार शाम को हो गया था। परिवार वालों ने बताया कि सगीर कपड़ों की फेरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। मृतक के चार बच्चे हैं पिता पांच माह से बीमार है। छोटे भाई ने बताया कपड़े खरीददारी करने के लिए लखनऊ जा रहे थे। सगीर का भी अंतिम संस्कार बुधवार शाम ही हो गया था।
बेसहारा हो गया जितेंद्र रस्तोगी का परिवार
धौरहरा कस्बे के ही 25 वर्षीय जितेंद्र कुमार रस्तोगी का बृहस्पतिवार दोपहर अंतिम संस्कार किया गया। जितेंद्र की मौत से पूरा परिवार बदहवास है। परिवार वालों के सामने जितेंद्र का हंसता चेहरा घूम रहा है। परिवार वालों ने बताया कि दीपावली में आतिशबाजी की दुकान लगाने के लिए लखनऊ आतिशबाजी का सामान लेने जा रहे थे। यह सदर बाजार में चाट का ठेला (खोमचा )लगाकर जीवन यापन करते थे।
हादसे ने छीन लीं परिवार की खुशियां
ड्यूटी कर अपने घर नकहा ब्लाक के कटकुसमा गांव जा रहे होमगार्ड कौशल के परिवार वालों को क्या पता था कि वह इस हाल में घर लौटेंगे। उनकी बजाय उनका शव आएगा। रोज का आना जाना तो उनकी दिनचर्या थी। 45 वर्षीय कौशल किशोर की धौरहरा फायर ब्रिगेड में तैनाती थी। वह रात में ड्यूटी करने के बाद रोज सुबह सात बजे अपने घर लौट जाते थे। बृहस्पतिवार को उसका अंतिम संस्कार हुआ।
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