लखीमपुर खीरी/ बांकेगंज। प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण और उनको कॉरीडोर मुहैया कराने की दिशा में केंद्र सरकार की इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट योजना को प्रदेश में लागू करने के लिए यूपी सरकार ने बजट में 48 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे दुधवा के टाइगर व एलिफैंट कॉरिडोर की व्यवस्थाएं और सुदृढ़ होने की उम्मीद जगी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व अब हाथी रिजर्व भी है। यहां के हाथी और बाघ जंगल में जंगल के विस्तृत क्षेत्र में इधर से उधर आसानी से आवागमन कर सकें इसके लिए टाइगर व एलिफैंट कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। किशनपुर सेंक्चुरी, दुधवा नेशनल पार्क और कतर्निया घाट के बीच कई जगह ऐसे पैचेज हैं, जहां आबादी और खेत हैं, जबकि यह बाघों और हाथियों की नस्ल सुधारने के साथ-साथ उनकी संख्या बढ़ाने के लिए भी जरूरी है।
बता दें कि करीब 25 साल पहले वन विभाग ने तराई आर्क नाम से एक कॉरीडोर विकसित करने की योजना बनाई थी। यह कॉरीडोर उत्तराखंड से लेकर नेपाल, दुधवा नेशनल पार्क कतर्निया घाट, सुहागी बरूआ, बलरामपुर होते हुए बिहार तक बनाया था। ताकि उत्तराखंड से लेकर बिहार और नेपाल तक बाघों का आवागमन हो सके, लेकिन इसमें कोई विशेष सफलता नहीं मिल सकी। अब प्रदेश सरकार ने इसके लिए अलग से धनराशि का प्रावधान किया है जिससे कॉरीडोर की सफलता की उम्मीद बढ़ी है।
भारत-नेपाल के जंगल आपस में मिले हुए हैं। नेपाल के शुक्लाफाटा और वर्दिया नेशनल पार्क से हाथियों के झुंड अक्सर दुधवा टाइगर रिजर्व में आते हैं। इन एलीफैंट कॉरीडोर को सुदृढ़ किया जाएगा। ऐसे कॉरीडोर भी विकसित किए जाएंगे जिससे दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजाेन,किशनपुर सेंक्चुरी, दुधवा नेशनल पार्क और कतर्निया घाट के जंगलों को आपस में जोड़कर एलीफैंट रिजर्व सुरक्षित कॉरीडोर बनाया जा सकेगा। करीब दो साल पहले दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों को बाघों के साथ ही तराई हाथी रिजर्व बनाया गया था।
गल के विस्तृत क्षेत्रफल और यहां की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जंगलों को जोड़कर कॉरीडोर बनाने की जरूरत थी। प्रदेश सरकार ने इसके लिए बजट में 48 करोड़ का प्रावधान किया है। - ललित वर्मा, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व