बांकेगंज। इंसानों-जानवरों पर हमला करने वाले बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने खंभारखेड़ा, ममरी, बांकेगंज आदि कई क्षेत्रों में 44 कैमरे लगाए, लेकिन मात्र दो कैमरों में ही बाघ की तस्वीर कैद हुई। सात पिंजरे लगाए गए, बकरिया बांधी गईं, लेकिन बाघ इनके पास भी नहीं फटक रहा है। पिछले तीस दिनों में चार लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन वन विभाग बाघ को नहीं पकड़ सका है।
पिछले एक माह में जिले में कई जगह बाघ और तेंदुआ हमलों की घटनाएं हुई है। इसके लिए दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी, शारदानगर और गोला रेंज जंगल से सटे प्रभावित गांवों में कैमरे लगाए गए हैं। इसमें बांकेगंज के बलारपुर गांव में 10, खंभारखेड़ा- महेवागंज 10 के अलावा अजान और इमलिया में 24 कैमरे लगाए गए हैं।
इन कैमरों में से सिर्फ बलारपुर गांव में लगे एक कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद हुई है। बाकी 43 कैमरों के पास बाघ या तेंदुआ नहीं गुजरा है। इसके साथ ही हमलावर बाघ को कैद करने के लिए तीनों जगह पर 7 पिंजरे लगाए गए हैं। लेकिन इन पिंजरों के पास बाघ फटका तक नहीं। यहां तक कि पिंजरे में बंधी बकरी के लालच में बाघ नहीं आया। अजान गांव में शुक्रवार को बाघ की गतिविधियों का पता लगाने के लिए वन विभाग ने ड्रोन कैमरे तक उड़ाए,लेकिन उसका पता नहीं चल सका है।
बाघ और तेंदुए के हमले में एक माह में गई चार लोगों की जान
01 अगस्त- शारदा नगर रेंज के खंभारखेड़ा में तेंदुए के हमले में 14 वर्षीय किशोर आंनद उर्फ गुड्डू की मौत।
06 अगस्त- खीरी थाना क्षेत्र के डिहपुरवा गांव निवासी 10 वर्षीय किशोर कृष्णकांत की तेंदुआ हमले में मौत।
23 अगस्त- गोला रेंज के बलारपुर गांव में बाघ हमले में 13 वर्षीय किशोरी जानकी की मौत।
27 अगस्त- मोहम्मदी रेंज के इमलिया गांव निवासी 45 वर्षीय अमरीश की बाघ हमले में मौत।
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बाघों और तेंदुओं की लोकेशन जानने के लिए 44 कैमरे और इन्हें कैद करने के लिए सात पिंजरे लगाए गए हैं। वन कर्मियों की टीम गठित कर चौबीस घंटे बारी-बारी से निगरानी कराई जा रही है। ग्रामीणों से सतर्कता बरतने के लिए कहा जा रहा है।
-संजय बिश्वाल, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग।