दीपावली को लेकर बच्चों से लेकर बड़ों में खासा उत्साह है। दीपोत्सव पर धूम धड़ाका के लिए पटाखा बाजार भी सज गया है। लक्ष्मी पूजन के बाद शुरू होने वाली आतिशबाजी का दौर देर रात तक चलता है। इस दौरान विशेष सतर्कता की जरूरत होती है, क्योंकि जरा सी लापरवाही त्योहार खराब कर सकती है। पटाखा आदि जलाते समय विशेष सतर्क रहें, क्योंकि जरा सी असावधानी शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। खासकर आंख, कान और त्वचा को। जिला अस्पताल की ईएनटी सर्जन डॉ. प्रियंका शर्मा का कहना है कि तेज ध्वनि वाले पटाखों से परहेज करें, क्योंकि तेज ध्वनि कान की सुनने वाली नसों को कमजोर कर सकती हैं। वहीं परदे फटने का भी खतरा रहता है। नेत्र सर्जन डॉ. आरसी अग्रवाल का कहना है कि आतिशबाजी के दौरान आंख में बारूद आदि पड़ जाए तो उसे आंख को साफ पानी से धोएं। जलन कम न होने पर जॉक्सान टयूब या फिर छोटे आंख के टयूब जो हर जगह आसानी से मिल जाते हैं उन्हें लगाए और उसके बाद अस्पताल आकर दिखाएं। स्किन रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र चौधरी का कहना है कि सूती कपड़े पहन कर ही आतिशबाजी करें और पानी की बाल्टी साथ रखें। पटाखा न दगने पर उसे छड़ी के सहारेे पानी की बाल्टी में डाल दें, उसका परीक्षण कदापि न करें, क्योंकि ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। बारूद से जलने पर आटा, आलू एवं पेस्ट आदि न लगाएं। सिर्फ पानी डाले, जिससे त्वचा की अंदरूनी सतह न जलने पाएं। कपड़ा आदि के चिपक जाने पर उसे स्वयं न छुड़ाएं अस्पताल आकर डॉक्टर को दिखाएं।