गरीबी के चलते रितेश होटल पर काम करता था। उसके पिता स्वामीदयाल ने बताया कि गरीबी के चलते कांवड़ यात्रा में भेजने के लिए उनके पास रुपये नहीं थे। रितेश को गोला जाने की जिद थी तो लोगों से रुपये मांगकर हंसी खुशी घर से गोला के लिए निकला था। देर शाम गमगीन माहौल में रितेश का अंतिम संस्कार किया गया।