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दीपोत्सव के उत्साह में जल गई 10 करोड़ की आतिशबाजी

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लखीमपुर खीरी। सोमवार को दिवाली पर जिलेवासियों ने खूब धूम धड़ाका किया। आतिशबाजी का सिलसिला आधी रात तक जारी रहा। कारोबारियों के मुताबिक, महंगाई के बावजूद जिले में करीब 10 करोड़ रुपये की आतिशबाजी बिकी है। इस कारण वायु गुणवत्ता सूचनांक 112 से 153 पर पहुंच गया, जो कि मॉडरेट की श्रेणी में आता है। इसमें सांस के गंभीर मरीजों को एहतियात बरतने की जरूरत है।
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कोरोना के कारण पिछले दो वर्षों तक दीपावली की रंगत काफी फीकी रही। उस समय त्योहार सिर्फ 3-4 करोड़ में ही सिमट गया था। इस बार लोगों ने खुलकर त्योहार मनाया। महंगाई के बावजूद लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। त्योहार को लेकर हर तरफ उल्लास छाया रहा।
सोमवार रात घरों में महालक्ष्मी और श्रीगणेेश का विधि विधान से पूजन किया गया। इसके बाद दीपावली के जश्न में करीब 10 करोड़ की आतिशबाजी जल गई। बच्चों ने मस्ताब, लहसुन, चरखी, अनार जलाकर पर्व का आनंद लिया तो वहीं बड़ों ने मिर्ची बम, राकेट, बुलेट बम, सतरंगी राकेट के साथ आसमान में फूटने वाले बम जलाकर पर्व मनाया।
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यहां बता दें कि जिले भर में अस्थायी तौर पर 25 जगहों पर 150 से अधिक दुकानें लगाई गईं थीं। जहां से करीब 10 करोड़ रुपये से भी अधिक की आतिशबाजी का कारोबार हुआ। पटाखा कारोबारियों ने बताया कि महंगाई को देखते हुए पहले बिक्री को लेकर तमाम आशंकाएं थीं, लेकिन दीपावली के दिन अच्छी बिक्री हुई। शहर के जीआईसी मैदान पर लगी करीब 100 दुकानों से एक करोड़ से अधिक आतिशबाजी की बिक्री होने का अनुमान है।
आतिशबाजी से निकले धुएं ने अचानक बढ़ाई सांस के मरीजों की मुसीबत
लखीमपुर खीरी। समय पर दवा लेने और एहतियात के बावजूद अस्थमा लोगों को परेशान कर रहा है। दिवाली की रात हुई आतिशबाजी से निकला धुुआं इनकी परेशानी और बढ़ा रहा है। एसीएमओ एवं चेस्ट फिजीशियिन डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि तापमान में उतार-चढ़ाव सांस के मरीजों की परेशानी को बढ़ा देता है। ऐसे में प्रदूषण, धूल व पटाखों के धुएं ये सभी मिलकर उसे कई गुना ज्यादा बढ़ा देते हैं। इससे अटैक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इससे बचाव के लिए सही समय पर दवाओं का सेवन, मास्क का प्रयोग व प्रदूषण से दूर रहना जरूरी है। अस्थमा रोगी सर्दी के मौसम में अपना विशेष ख्याल रखें।
मंगलवार को कई सांस के मरीज जिला अस्पताल पहुंचे
दिवाली पर राजधानी लखनऊ का एक्यूआई 243 पहुंच गया, जिसकी वजह से शहर में हवा का स्तर काफी खराब रहा। वहीं खीरी में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की तरफ से हवा में प्रदूषण का स्तर जानने के लिए कोई मीटर नहीं लगा है। मौसम विज्ञान और पर्यावरण से जुड़ीं कई एजेंसी ही वायु में प्रदूषण पर नजर रखती हैं। उनके मुताबिक, 24 अक्तूबर को जिले का एक्यूआई 112 था, जो 25 अक्तूबर को बढ़कर 153 पहुंच गया, जो कि मॉडरेट की श्रेणी में है। इसमें सामान्य आदमी को तो नहीं, लेकिन सांस के गंभीर मरीजों को परेशानी हो सकती है। मंगलवार को कई सांस के मरीज जिला अस्पताल भी दवा लेने पहुंचे।
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सांस के मरीज रखें ध्यान
भोजन में ताजे फल, सब्जियां अधिक लें।
मास्क का उपयोग करें, घर से बाहर निकलने से बचें।
हाथों को बार-बार धोते रहें।
धूप निकलने के बाद ही सुबह की सैर पर निकलें।
धूल एवं धुआं वाली जगहों पर जाने से बचें।
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