- नगर के सुभाष चौक, रामकोला रोड, कठकुइयां मोड़ और जटहां रोड पर सवारी बैठाते हैं टेंपो चालक
- सड़क पर बेखौफ होकर सवारी भरते हैं चालक, लगता है हर दिन जाम
पडरौना। बेखौफ होकर बीच सड़क पर सवारी बैठाने व उतारने का खेल टेंपो व ई-रिक्शा चालक पुलिस की शह पर करते हैं। मनमर्जी से वाहन चलाने के लिए पुलिस को समय से चढ़ावा भी चढ़ाते है। ताकि उनको किसी भी तरह की परेशानी न हो। भले ही राहगीर परेशान हो जाएं। इनकी मनमानी से जाम में फंसकर एंबुलेंस में मरीज की मौत भी क्यों न हो जाए। यह नजारा शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर दिख जाएगा।
शहर की सड़कों पर सवारी बैठाने के लिए टेंपो और ई-रिक्शा चालकों में होड़ मची है। जहां भी सवारी मिल जाए, वहीं वाहन रोककर सवारी बैठा लिए जा रहे हैं। मनमानी रूप से टेंपो और ई-रिक्शा चलाने वाले चालक स्टैंड पर नहीं जाते हैं। बाजार, प्रमुख चौराहों पर टेंपो-ई रिक्शा रोककर सवारी बैठाने लग जा रहे हैं। इनकी वजह से जगह-जगह सड़कों पर जाम लग जा रहा है। इसके लिए चालकों को शहर पुलिस चौकी, यातायात पुलिस और नगरपालिका को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है।
जटहा रोड पर 40, रामकोला, खड्डा व पनिवहवा के लिए 150, चौउतरवा के लिए 17, कठकुइयां 200, कसया के 50 कुबरेस्थान व शिवपुर के लिए 30 और मंसाछापर के लिए 10 टैंपो सवारी गाड़ी के रूप में संचालित होते हैं। इसके अलावा नगर में करीब पांच सौ ई-रिक्शा संचालित होते हैं। वैसे तो रामकोला, खड्डा, पनियहवा रुट पर चलने वाले टैंपो चालकों के लिए सुभाष चौक स्थित केन यूनियन परिसर में टैंपो स्टैंड बनाया गया है। इसके अलावा कठकुइयां, दुदही और तमकुहीरोड के लिए कठकुइंया मोड, शिवपुर व कुबेरस्थान के लिए गंडक नहर की पटरी और जटहां बाजार के लिए दरबार रोड मोड़ के कुछ आगे जटहां रोड पर टैक्सी स्टैंड बनाया गया है। लेकिन ये टैंपो चालक पूरे दिन शहर में घूम-घूम कर सवारी बैठाते हैं।
छह सौ रुपये हर महीना देना पड़ता है विभागीय अधिकारी को
ये टैंपो चालक यूं ही ऐसा नहीं करते हैं, इसके लिए वे हर माह पुलिस समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को मोटी रकम चढ़ावे में देते हैं। नाम नहीं बताने की शर्त पर टैंपो चालकों ने बताया कि यहां वाहन चालक और संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल ठीक है। जो वैसे तो सभी टैंपो चालक कुछ न कुछ चढ़ावा चढ़ाते ही हैं, लेकिन जो टैंपो चालक अपने निर्धारित टैंपो स्टैंड को छोड़ अन्य किसी स्थान से सवारी बैठाते हैं वे हर माह छह सौ रुपये ईमानदारी के साथ अधिकारियों को दे देते हैं। टैंपो चालकों ने बताया कि अधिकारियों को दिए जाने वाले चढ़ावा को एकत्र करने के लिए एक व्यक्ति को नामित किया गया है। वे सभी से निर्धारित धनराशि एकत्र कर ईमानदारी के साथ अधिकारियों तक पहुंचा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जो टैंपो चालक अपने निर्धारित टैक्सी स्टैंड से सवारी नहीं बैठाते हैं वे छह सौ रुपये प्रति माह पुलिस को चढ़ावा के नाम पर देते हैं। जो चालक टैंपो स्टैंड से सवारी बैठाते हैं उनसे दो सौ रुपये से चार सौ रुपये तक हर माह वसूला जाता है। चढ़ावा जमा होते ही ये चालक बेखौफ हो जाते हैं। जिसके बाद वे मनमाने तौर पर शहर में जहां भी कहीं सवारी दिख जाए, वहीं टैंपो रोककर सवारी बैठा लेते हैं। इससे शहर की सभी सड़कों पर दिन में कई बार जाम तो लगती ही है। इसके अलावा सवारी बैठाने के लिए बाइक समेत अन्य वाहनों के आगे चल रहे टैंपो या ई-रिक्शा चालक अचानक अपना वाहन रोक देते हैं, जिससे कई बार छोटी-मोटी दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं।