गृहस्थी छोड़कर खाद के लिए कतार में लग रहीं महिलाएं
पति के बाहर रहने और घर से दूर मजदूरी करने की वजह से समिति पर आना बनी मजबूरी
एक बोरा यूरिया के लिए लग जा रहे पांच से छह घंटे का समय
पडरौना। पति के परदेश में रहने और घर से बाहर मजदूरी करने की वजह से यूरिया खाद लेने के लिए गृहस्थी का काम छोड़कर अब महिलाएं भी कतार में लग रही हैं। ठंड के मौसम में एक बोरी यूरिया खाद लेने में पांच से छह घंटे का समय लग रहा है। सर्वर फेल होने या धीमे चलने की वजह से महिलाओं का पूरा दिन खाद लेने में गुजर जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सर्वर की समस्या आने पर उसे दूर किया जा रहा है।
जिले में गेहूूं् की फसल की सिंचाई किसान कर रहे हैं। सिंचाई के बाद तत्काल यूरिया की जरूरत पड़ रही है। इसलिए लोग सर्दी के मौसम में अल सुबह ही समितियों पर पहुंच जा रहे हैं। पुरुषों के अलावा इनमें महिलाओं की तादाद अधिक नजर आ रही है। महिलाएं सुबह-सुबह भोजन पकाकर बच्चों को स्कूल भेजने के बाद यूरिया लेने के लिए कतार में लग जा रही हैं। यह सिलसिला बीते एक सप्ताह से चल रहा है।
पडरौना नगर के सुभाष चौक पर सहकारी समिति है। इस समिति पर शुक्रवार की सुबह महिला और पुरुषों सहित करीब सौ किसान लाइन में लगे थे। इनमें से अधिकतर लोगों को सिर्फ एक बोरी यूरिया की आवश्यकता थी। लोगों ने बताया कि सुबह ही लाइन में लग गए थे। यहां कभी यूरिया का कमी का हवाला दिया जा रहा है, तो कभी सर्वर नहीं चलने की बात कही जा रही है। इससे महिलाओं को काफी दिक्कत हो रही थी। महिलाओं ने कहा कि घर-गृहस्थी का काम छोड़कर यूरिया लेने के लिए वह लोग सुबह ही लाइन में लग गई थीं।
दो बोरी से अधिक खाद के लिए देंगे खतौनी
जनपद में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन की तरफ आधार कार्ड पर एक या दो बोरी खाद दी जा रही है। इसके अलावा दो बोरी से अधिक खाद के लिए किसानों को खतौनी, किसान बही दिखाना पड़ रहा है। इसका डाटा भी ऑनलाइन फीड किया जा रहा है। इस वजह से सर्वर की समस्या आ रही है। इस साल जिले में रवि की फसल एक लाख 18 हजार हेक्टेयर भूमि पर बुआई की गई है। इसके लिए यूरिया का लक्ष्य 50100 मीट्रिक टन है। इसके सापेक्ष 30 दिसंबर तक 27414 मीट्रिक टन यूनिया जनपद में उपलब्ध हो चुकी है। समिति पर 20045 मीट्रिक टन के सापेक्ष 12300 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध हो चुकी है। जनपद में कुल 160 समितियां हैं, जिनमें 60 पर यूरिया उपलब्ध है।
पति घर से बाहर मजदूरी करते हैं। गृहस्थी का काम छोड़कर एक बोरी यूरिया के लिए आई हूं। तीन से चार किसानों को खाद मिली है। बताया जा रहा है कि दो घंटे से सर्वर फेल है। दो दिन से पूरा दिन यहीं गुजर जा रहा है।
मनोरमा, किसान
पतिा घर से बाहर रहते हैं। घर में भोजन भी पकाना रहता है। सुबह जल्दी-जल्दी खाना तैयार करके निकली थी। खाद लेने के चक्कर में घर-गृहस्थी का काम प्रभावित हो रहा है। आने-जाने में दो घंटे लग जाते हैं। दो बोरी यूरिया के लिए तीन घंटे से लाइन में लगी हूं।
इसरावती, किसान
गेहूं की फसल की सिंचाई किए 10 दिन से अधिक हो गया है। यूरिया के लिए कई समितियों का चक्कर लगाया हूं। यहां आने पर मालूम हुआ कि सर्वर फेल है।
कामेश्वर, किसान
जनपद में यूरिया आते ही खत्म हो जा रही है। दो दिनों से समिति का चक्कर काट रहा हूं। सर्वर फेल होने की समस्या बनी हुई है। इससे लोग वापस लौट रहे हैं।
पंकज सिंह, किसान
वर्जन
जिनके घरों में पुरुष सदस्य नहीं हैं। उनके परिवार की महिलाएं ही खाद लेने पहुंच रही हैं। कभी-कभी सर्वर की समस्या आ रही है। इसे दूर किया जाता है। 126 समितियों के सापेक्ष तकरीबन 60 पर यूरिया उपलब्ध है। लक्ष्य के अनुरूप किसानों को खाद उपलब्ध कराने का प्रयास चल रहा है।
डॉ. बाबूराम, जिला कृषि अधिकारी