कहीं के निकाय चुनाव में भाजपा तो कहीं निर्दल या सपा, बसपा के उम्मीदवार जीते हैं
नगर पालिका और नगर पंचायत की अधिकतर सीटों पर सभासद अध्यक्षों के दल के नहीं हैं
अधिकतर जगहों पर अधिक है निर्दलीय सभासदों की संख्या
एक दल के अध्यक्ष और सभासद न होने से बोर्ड की बैठकों में सहमति कम हंगामा अधिक होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले में नगर पालिका हो या नगर पंचायत, इनमें अध्यक्ष भाजपा, सपा या बसपा के उम्मीदवार विजयी हुए हैं, लेकिन ज्यादातर सभासद उनके दल के नहीं जीते हैं। ज्यादातर जगहों पर निर्दलीय सभासदों की संख्या अधिक है। ऐसे में अध्यक्ष को आगे शहर की सरकार चलाने में दिक्कतें पेश आएंगी। विकास कार्य जमीन पर उतारने में कठिनाई होगी। बोर्ड की बैठकों में सहमति कम हंगामे अधिक होंगे। ऐसे में शहर की सरकार चलाना नगरपालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
नगर पालिका अथवा नगर पंचायत अध्यक्ष और वहां के सभासद के बीच अच्छे तालमेल से शहर में बेहतर कार्य होने की संभावना रहती है। मसलन, माना जाता है कि यदि भाजपा के नगर पालिका या नगर पंचायत के अध्यक्ष हैं तथा केंद्र और प्रदेश में उसी दल की सरकार भी है तो विकास कार्य होने की संभावना अधिक रहती है। जनपद की तीन नगर पालिकाओं और दस नगर पंचायतों के मौजूदा नगर निकाय चुनाव के परिणाम पर नजर डालें तो ज्यादातर सभासद निर्दल या दूसरे दलों के हैं। ऐसे ही कहीं सभासद भाजपा के अधिक हैं तो अध्यक्ष निर्दल, सपा अथवा बसपा के निर्वाचित हैं।
इस बार के नगर निकाय चुनाव में नगर पालिका की तीन सीटों में दो पर भाजपा प्रत्याशी जीते हैं। इसी तरह नगर पंचायत की दस सीटों में से पांच पर भाजपा प्रत्याशियों को जीत मिली है, लेकिन सभासद अधिकतर निर्दलीय हैं। इसके अलावा नगर पंचायत अध्यक्ष की चार सीटों पर निर्दल प्रत्याशी ही जीते हैं।
जीते नगर पालिका अध्यक्ष और सभासदों का दल
पडरौना नगर पालिका से भाजपा उम्मीदवार विनय जायसवाल जीते हैं। इसके 25 वार्डों में भाजपा के सात, बसपा के दो और निर्दल 16 सभासद निर्वाचित हुए हैं। कुशीनगर नगर पालिका से भाजपा उम्मीदवार किरन जायसवाल विजयी हुई हैं। इसके 27 वार्डों में भाजपा के नौ, बसपा का एक और निर्दल 17 सभासद निर्वाचित हुए हैं। हाटा नगर पालिका से सपा उम्मीदवार रामानंद सिंह चुनाव जीते हैं। यहां भाजपा के आठ, सपा के आठ, बसपा का एक और निर्दलीय आठ सभासद चुनाव जीते हैं। यह स्थिति बताती है कि नवनिर्वाचित अध्यक्षों को नगर पालिका बोर्ड का संचालन करने में कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
दस नगर पंचायतों में भी अध्यक्ष और सभासदों के दल जुदा
कप्तानगंज नगर पंचायत से भाजपा उम्मीदवार सुशीला खेतान अध्यक्ष चुनी गई हैं। इस नगर पंचायत के 17 वार्डों में भाजपा के सात, सपा के दो और निर्दल आठ सभासद चुने गए हैं। खड्डा से भाजपा उम्मीदवार संगीता वर्मा अध्यक्ष चुनी गई हैं। यहां भी सपा के दो, भाजपा के छह और निर्दल चार प्रत्याशी जीते हैं। छितौनी में अध्यक्ष के पद पर निर्दल प्रत्याशी अशोक निषाद निर्वाचित हुए हैं। यहां भाजपा के पांच, सपा का एक और निर्दल नौ सभासद चुने गए हैं। तमकुहीराज में भाजपा के जयप्रकाश गुप्ता अध्यक्ष चुने गए हैं तो सभासद के पद पर बीजेपी का एक, कांग्रेस का एक और निर्दल 12 प्रत्याशी विजयी हुए। दुदही नगर पंचायत से बसपा उम्मीदवार शायदा खातून अध्यक्ष चुनी गई हैं। यहां भाजपा के पांच और निर्दल दस सभासद निर्वाचित हुए हैं। फाजिलनगर में निर्दल प्रत्याशी शत्रुमर्दन प्रताप शाही के हाथ में मतदाताओं ने अध्यक्ष पद की कमान सौंपी है। यहां से आम आदमी पार्टी, सपा और बसपा के एक-एक तथा निर्दल 12 प्रत्याशी निर्वाचित हुए हैं।
इसी तरह मथौली नगर पंचायत में निर्दल प्रत्याशी नवरंग सिंह अध्यक्ष चुने गए हैं, जबकि सभासद के पद पर भाजपा के सात और निर्दल नौ प्रत्याशियों की जीत हुई है। रामकोला नगर पंचायत से भाजपा की सुनीता चौधरी अध्यक्ष चुनी गई हैं। उनके साथ बोर्ड के लिए बसपा से एक, सपा से चार, भाजपा से पांच और निर्दल दस सभासद चुने गए हैं।
सुकरौली नगर पंचायत से निर्दल प्रत्याशी राजनेति कश्यप अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। यहां से सपा के छह, भाजपा के छह तथा निर्दल तीन उम्मीदवार सभासद चुने गए हैं। ऐसे ही सेवरही नगर पंचायत से भाजपा उम्मीदवार सोनिया जायसवाल अध्यक्ष चुनी गई हैं। वहां से भाजपा के पांच और निर्दल 13 सभासद जीते हैं। इस तरह की विसंगति वाली स्थिति में नवनिर्वाचित अध्यक्ष के समक्ष सामान्य बैठाकर कार्य करने में मुश्किलें आएंगी।
पडरौना के चेयरमैन बोले
विकास के नाम पर सबको साथ लेकर चला जाएगा। शहर की जनता ने जिस विश्वास के साथ जीत दिलाई है, उस विश्वास को कायम रखा जाएगा। शहर का विकास और तेजी से कराया जाएगा।
-विनय जायसवाल, नवनिर्वाचित अध्यक्ष, पडरौना नगर पालिका
राजनीति के जानकार से बातचीत
आज के राजनीतिक परिवेश में सिद्धांत नाम की कोई चीज नहीं है। स्वार्थ हर जगह प्रभावी है। जहां जिसका स्वार्थ टकराएगा, वह जुड़ जाएगा। इसलिए निर्दल या दूसरे दल के सभासद भी अपनी नगर पालिका या नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष के साथ हो जाएंगे।
-बालेश्वर यादव, पूर्व सांसद