- पुश्तैनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे झिलमिल मियां, 27 साल से राज दरबार में बनाते हैं रावण का पुतला
- 45 फीट का रावण का पुतला बनकर हुआ तैयार, बुराई पर अच्छाई के प्रतीक पर्व की तैयारी पूरी
पडरौना। रावण का पुतला बनाने के लिए एक माह से राजदरबार के सामने स्थित रामलीला मैदान में चल रही तैयारी सोमवार शाम तक पूरी कर ली गई। हर साल की तरह खड्डा के झिलमिल मियां की टीम ने सवा लाख रुपये की लागत से रावण का 45 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया है। पुतला टुकड़ों में हैं। मंगलवार को दशहरा के दिन इस पुतले को जोड़कर रामलीला मैदान में खड़ा किया जाएगा। यह पुतला भले ही रावण का है, लेकिन मजहब से ऊपर उठकर पुश्तैनी परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कारीगर के लिए तो सिर्फ भूख मिटाने की चिंता रहती है।
बुराई पर अच्छाई का प्रतीक दशहरा की तैयारियां कई दिनों से चल रही हैं। जगदीशगढ़ स्टेट पडरौना राज दरबार में एक माह पहले से रावण का पुतला बनाने का कार्य चल रहा है। खड्डा कस्बे के रहने वाले झिलमिल मियां 27 सालों से यहां तो 30 साल से रामकोला में रावण का पुतला बनाते हैं। इस पुतले में कारीगर अपनी कला को जीवंत रूप देने का बखूबी प्रयास करते हैं। झिलमिल मियां बताते हैं कि रावण का पुतला राजदरबार में कई दशकों से बनता है और जलाया जाता है। इसके पूर्व अब्बू गजन राइन बनाते थे। होश संभालने के बाद पुश्तैनी पेशे से जुड़ गया। अब तो प्रतिमाओं के पंडाल टेंट से बनाए जा रहे हैं। इसके पूर्व बांस-बल्लियों पर जब देवी पंडाल या गुफा बनता था तो काम ज्यादा रहता था। इस काम से तो पेट पालना मुश्किल है, लेकिन पुश्तैनी परंपरा का भी ख्याल रखना पड़ता है। इसलिए राजदरबार के अलावा रामकोला और मठिया गांव में रावण का पुतला अपनी टीम के साथ बनाता हूं। एक माह पूर्व से रावण का पुतला बनाने का काम लगा दिया जाता है और विजयादशमी से एक दिन पूर्व पुतला तैयार कर रामलीला मैदान में खड़ा कर दिया जाता है।
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रावण के पुतले पर भी महंगाई की मार
-झिलमिल मियां बताते हैं कि यहीं रावण का पुतला पिछले वर्ष 80 हजार में बनकर तैयार हो गया था। इस साल इसकी लागत डेढ़ लाख के करीब पहुंच गई है। 30 हजार मजदूरी के अलावा, कील, 40 बांस, तार, रंगीन पेपर और 50 हजार का पटाखा पुतले में बांधा जाता है। इसके अलावा अन्य खर्च भी लगते हैं।
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चौथा गुब्बारा आसमान में दिखते ही उमड़ जाती है भीड़
-चौथा गुब्बारा आसमान में दिखते ही रामलीला मैदान में लोगों की भी भीड़ पहुंच जाती है। इसके बाद रावण का पुतला जलाया जाता है। रावण के पुतले पर छह गुब्बारा लगा होता है। बीस मिनट के अंतराल पर चारों गुब्बारा आसमान में दिखता है।
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नीलांबुज मिश्र