1,24,980 प्रसव कराने का मिला था लक्ष्य, केवल 47,991 प्रसव सरकारी अस्पतालों में हुए
एक-दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी, 32 आशा कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने की योजना कुशीनगर में हवाहवाई दिख रही है। तमाम कोशिशों के बावजूद प्राइवेट नर्सिंग होम का तिलिस्म नहीं टूट रहा है। विभागीय लापरवाही से एक साल में 25,751 महिलाओं का प्रसव प्राइवेट अस्पतालों में हुआ है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। गांवों में आशा, एएनएम की तैनाती के बाद भी सरकारी अस्पतालों तक गर्भवती महिलाओं का न पहुंचना सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत सुरक्षित प्रसव कराने पर शासन का जोर है। सरकारी अस्पतालों में इसके लिए बेहतर इंतजाम भी किया गया है। प्रसूताओं को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में लक्ष्य के सापेक्ष प्रसव नहीं हो पा रहा।
स्वास्थ्य विभाग को वर्ष 2022-23 में 1,24,980 प्रसव कराने का लक्ष्य मिला था, लेकिन 73,742 प्रसव हुए। इसमें सिर्फ 47,991 सरकारी अस्पतालों में हुआ है। कमीशन के चक्कर में प्राइवेट अस्पतालों में गर्भवतियों को पहुंचाने और सीएचसी, पीएचसी पर प्रसव कराने में उदासीनता बरतने वाली 32 आशा कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। शासन से सख्ती के बाद अफसरों ने जिम्मेदारों को बचाते हुए कार्रवाई की खानापूर्ति कर ली।
आशा और एंबुलेंस चालकों की मिलीभगत
विभागीय सूत्रों के मानें तो आशा वर्करों और एंबुलेंस चालकों के माध्यम से ही गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव का सपना दिखाकर पहुंचाया जा रहा है। कुछ माह पूर्व शहर के एक अस्पताल में छापेमारी हुई तो गर्भवतियों के परिजनों ने यह बात बताई थी। बावजूद जिम्मेदार अफसरों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अफसरों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
सरकारी अस्पतालों में लगातार प्रसव की संख्या कम होने से विभागीय अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2021-22 में भी 1,18,324 प्रसव कराने का लक्ष्य मिला था, लेकिन 67,366 प्रसव हुए थे। इसमें भी बीस हजार प्रसव प्राइवेट अस्पतालों में हुआ। रात को जिला महिला अस्पताल में आने वाली गर्भवतियों का ऑपरेशन नहीं होता है, रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में आशा कार्यकर्ता या दलाल अपने झांसे में लेकर प्राइवेट नर्सिंग होम में चले जाते हैं। इसके एवज में उन्हें करीब दो से ढाई हजार तक कमीशन मिल जाता है।
इन ब्लॉकों में नर्सिंग होम में ज्यादा प्रसव
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में 193 नर्सिंग होम का पंजीकरण है। 30 पंजीकृत ऐसे प्राइवेट अस्पताल हैं, जहां प्रसव होता है। इससे इतर जिले में 300 से अधिक नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। मोतीचक ब्लॉक में 2,011, सुकरौली ब्लॉक में 1,967, नगरीय पीएचसी पडरौना में 1,500, तमकुहीराज ब्लॉक में 2,352 प्रसव एक साल में हुए हैं। इसके सापेक्ष इन ब्लॉकों के प्राइवेट नर्सिंग होम में तीन गुने प्रसव हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास प्राइवेट अस्पतालों में प्रसव के सिर्फ वही आंकड़े हैं, जो चिह्नित अस्पतालों से मिल सके। इसके अलावा भी विभागीय रडार से दूर तमाम अस्पतालों में आए दिन प्रसव कराए जा रहे हैं।
एक ब्लॉक में दस हजार प्रसव का है लक्ष्य
जिले में 15 सीएचसी और 56 पीएचसी संचालित होते हैं। सभी स्थानों पर प्रसव की सुविधा भी है। इसके बावजूद यहां गर्भवती क्यों नहीं पहुंचती हैं, यह बड़ा सवाल है। फाजिलनगर, दुदही, खड्डा और जिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश सीएचसी पर सिर्फ नाम का ही प्रसव हुआ है। जिले में 3,642 आशा कार्यकर्ता हैं, जिसमें काम में लापरवाही पर 32 आशा कार्यकर्ताओं को हटा दिया गया है। अभी तक इन गांवों में दूसरे आशा कार्यकर्ताओं को नहीं रखा गया है, जबकि आशा स्वास्थ्य महकमे की अंतिम कड़ी होती हैं।
प्राइवेट अस्पतालों से ही आ रहे अधिक नवजात
जिला अस्पताल में 25 बेड की क्षमता वाले एसएनसीयू में 50 नवजातों को भर्ती किया गया है। इसमें फीवर, झटके, पीलिया और कम वजन वाले अधिकांश बच्चे हैं। इनमें 27 बच्चे सिर्फ नर्सिंग होम से आए हैं। एसएनसीयू के इंचार्ज डॉ. विजय सिंह की मानें तो कहीं से भी कोई नवजात को लेकर आता है, तो उसको भर्ती कर इलाज देना प्राथमिकता है। सरकारी अस्पतालों से चार गुना अधिक नवजात प्राइवेट अस्पतालों से यहां आते हैं।
केस एक
तीन दिन पूर्व विजयपुर गांव की किरन देवी को रात में प्रसव पीड़ा हुई। आशा उन्हें सरकारी अस्पताल न लाकर मां विंध्यवासिनी अस्पताल दुदही लेकर चली गई। प्रसव के बाद नवजात की तबीयत बिगड़ी तो जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भेज दिया, जहां बच्चे का इलाज चल रहा है।
केस दो-
रामकोला क्षेत्र के बसडीला गांव की निवासी किरन प्रजापति को आशा अपने झांसे में लेकर सिधुआं बाजार के कुशवाहा हेल्थ केयर सेंटर पर लेकर गई। सिजेरियन के बाद महिला ने बच्चे को जन्म दिया। वजन कम होने पर उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में बच्चे को भर्ती किया गया है।
केस तीन
होरलापुर गांव निवासी विनीता सिंह को प्रसव पीड़ा होने पर घरवाले जिला अस्पताल लेकर आए। तत्काल ऑपरेशन की बात कहकर एक स्वास्थ्यकर्मी ने अनुष्का लाइफ केयर अस्पताल अर्जुनहां भेज दिया। सिजेरियन के बाद बच्चे को जिला अस्पताल के एसएनसीयू में रखना पड़ा।