बनारस, प्रयागराज के लिए नहीं है एक भी ट्रेन, कोरोना कॉल से ही नहीं होता बापूधाम का ठहराव
फोटो है। प्लेटफाॅर्म पर ट्रेन आते ही शुरू हो जाती है दौड़, सीट मिल जाने पर मिलती है राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। बापू धाम एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव कप्तानगंज जंक्शन पर कोरोना काल के बाद से ही बंद है। इसके चलते यात्रियों को गोरखपुर जाकर इन ट्रेनों को पकड़ना पड़ता है। इसके अलावा गोरखपुर-नरकटियागंज रेल खंड स्थित इस जंक्शन से प्रतिदिन 20 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। जैसे ही कोई ट्रेन इस रेलवे स्टेशन पर आकर रुकती है, यात्रियों में दौड़ शुरू हो जाती है। यह दौड़ सीट के लिए होती है। क्योंकि यात्रियों की संख्या के मुकाबले ट्रेनों की संख्या कम है। सीट पाने की होड़ में यात्री दौड़ लगाते हैं। जो पिछड़ जाते हैं, उन्हें खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है। इस रेल मार्ग पर बनारस और प्रयागराज जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं है।
गोरखपुर-नरकटियागंज रेल मार्ग स्थित कप्तानगंज जिले का एक मात्र रेलवे जंक्शन स्टेशन है। यहां यात्री सुविधाओं का अभाव है। पूरी व्यवस्था राम भरोसे चलती है। स्टेशन का मुख्य गेट तक यात्रियों को छोड़ने वाले वाहनों का अतिक्रमण रहता है। कप्तानगंज रेलवे जंक्शन का शनिवार की दोपहर 3:30 बजे अमर उजाला ने पड़ताल की, तो यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की कमी के साथ सुरक्षा की भारी कमी दिखी।
तत्काल टिकट के लिए यात्री मारे-मोर फिर रहे थे। तत्काल टिकट लेने के लिए पहुंचे यात्रियों में से शनिवार को केवल दो यात्रियों को स्लीपर और दो यात्रियों को एसी टिकट मिल सका था, जबकि टिकट खिड़की के पास काफी संख्या में यात्री टिकट के लिए लाइन में खड़े थे।
3:40 बजे प्लेटफार्म नंबर दो पर अवध एक्सप्रेस के बरौनी से बांद्रा टर्मिनल के लिए जाने वाली ट्रेन की सूचना मिली, तो यात्री सीढ़ी के बजाय रेलवे ट्रैक पकड़कर प्लेटफ़ॉर्म नंबर एक से दो पर जाने लगे। ऐसा लग रहा था कि भगदड़ जैसा माहौल हो गया हो। जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर पहुंची, यात्री सीट पाने के लिए बोगी के पीछे दौड़ने लगे। कोई चलती ट्रेन में ही चढ़ने लगा तो कोई ट्रेन की खिड़की के रास्ते अपना बैग सीट पर रखने लगा।
आरपीएफ के जवान इन यात्रियों को रोकने के बजाए वे आपस में बातें करने में मस्त दिखे। प्लेटफार्म नंबर दो पर शेड न होने के कारण यात्री सीढ़ी के नीचे और प्लेटफार्म नंबर पर बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से स्टेशन परिसर में ही खड़े होने को मजबूर थे। चिलचिलाती धूप के चलते यात्री काफी परेशान दिखे।
रेलवे स्टेशन के बाहर यात्रियों के लिए बना साइकिल स्टैंड के बजाय लोग मेन गेट पर वाहन खड़े कर रखे थे। इससे स्टेशन से बाहर निकलने वाले यात्रियों को बाहर काफी दिक्कतों का सामना पड़ा। साइकिल स्टैंड के संचालक कन्हैया लाल रावत ने बताया कि यहां वाहन खड़ा करने को लेकर लोगों से अक्सर नोकझोंक होती है, लेकिन स्थानीय रेल प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिलता है।
कोरोना काल से बंद है बापूधाम व कई अन्य ट्रेनों का ठहराव
कोरोना काल के बाद से ही मुजफ्फरपुर से बनारस होते हुए प्रयागराज जाने वाली बापूधाम ट्रेन का ठहराव कप्तानगंज जंक्शन पर बंद है। इसके चलते कप्तानगंज से बनारस और प्रयागराज जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं है। इस रेल मार्ग पर तीन समर स्पेशल ट्रेनों का संचालन होता है, लेकिन ठहराव एक का भी नहीं है। भागलपुर गांधीधाम एक्सप्रेस भी कप्तानगंज के रास्ते जाती है, लेकिन कप्तानगंज में उसका ठहराव नहीं है। सीतामढ़ी, आनंद विहार एक्सप्रेस, दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस का कप्तानगंज में ठहराव नहीं है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसी तरह दरभंगा जालंधर एक्सप्रेस, कटिहार से दिल्ली जाने वाली हमसफर, मुजफ्फरपुर से आनंद विहार जाने वाली गरीब रथ आदि ट्रेनों का ठहराव भी कोरोना काल से ही बंद है।
कोटा में बेटी नीट की तैयारी करती है। उससे मिलने के लिए जाना था, लेकिन कोटा के लिए सिर्फ अवध एक्सप्रेस ट्रेन होने के कारण टिकट मिलना मुश्किल है। मजबूरन 14 जून के लिए गोरखपुर से कोटा के लिए 20 नंबर का वेटिंग टिकट लेना पड़ा है।
- मुकुंद सिंह, निवासी कप्तानगंज
कप्तानगंज रेलवे स्टेशन से होकर जाने के लिए तो बहुत ट्रेनें हैं, लेकिन ठहराव नहीं है। इसके चलते व्यवसाय और निजी कार्य से जाने के लिए बस की सेवा लेने के लिए मजबूर होते हैं।
- बैजनाथ गुप्ता, निवासी कप्तानगंज
कोटा में बेटा नीट की तैयारी करता है। उसे लेकर अवध एक्सप्रेस से जाना था। टिकट बनवाने के लिए बीते पांच दिन से रेलवे स्टेशन का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन तत्काल टिकट नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते यात्रा का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ रहा है।
- कुंवर बहादुर सिंह, निवासी करीतीन
सप्तक्रांति ट्रेन से दिल्ली के लिए टिकट लेने आया था, लेकिन 32 नंबर का वेटिंग मिला है। कंफर्म टिकट नहीं होने के कारण यात्रा करने में परेशानी होगी।
- भुवनेश्वर विश्वनाथ पांडेय, निवासी फुलवरिया।