कैसे संभले यातायात व्यवस्था, जरूरत के हिसाब से ट्रैफिक पुलिस ही नहीं
- कई प्रमुख स्थलों पर यातायात पुलिस की नहीं है तैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। शहर सहित जनपद के प्रमुख कस्बों और बाजारों में यातायात व्यवस्था चुनौती बनती जा रही है। हर दिन शहर से लगायत प्रमुख कस्बों और बाजारों में जाम लगता है, लेकिन इसे नियंत्रित करने के लिए जिले में एक भी टीएसआई नहीं है। इसके अलावा हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल भी आवश्यकता से बहुत कम हैं।
पडरौना शहर हो या कसया, हाटा, कप्तानगंज, रामकोला, खड्डा, सेवरही, तमकुहीराज, दुदही जैसे नगर और कस्बे, इन स्थानों पर प्रतिदिन भीड़ बढ़ती जा रही है। यही हाल प्रमुख बाजारों का है, जहां जाम लगता रहता है। इसकी बड़ी वजह नो इंट्री अथवा संकरे रास्तों पर भी भारी वाहनों का बेरोकटोक आना-जाना है।
पडरौना और कसया जिले के बड़े स्थल हैं। इनमें पडरौना जनपद मुख्यालय तो कसया भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर के निकट होने के कारण महत्वपूर्ण है। इन दोनों स्थानों पर जाम लगता रहता है। शहरी क्षेत्र हों या बाजार, वाहनों के व्यवस्थित ढंग से संचालन के लिए यातायात पुलिसकर्मियों की संख्या काफी कम होने के कारण आवश्यकतानुसार उनकी तैनाती नहीं हो पाती है, जिससे भारी वाहनों के चालक मनमानी तरीके से कहीं भी प्रवेश कर जाते हैं, जो जाम का कारण बनते हैं।
टीएसआई की सभी पद रिक्त
विभाग की मानी जाए तो जनपद में यातायात निरीक्षक का एक पद स्वीकृत है, जिस पर टीआई की तैनाती है, लेकिन टीएसआई के तीन पद हैं। इन पर एक की भी तैनाती नहीं है। हेड कांस्टेबल के 17 पदों में से पांच ही भरे हुए हैं। इसी तरह कांस्टेबल के 54 पदों में से सिर्फ 12 पर तैनाती है। हालांकि, यातायात व्यवस्था के लिए 70 होमगार्ड और 25 पीआरडी के जवान मिले हैं।
यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के किए जा रहे इंतजाम
टीआई सत्य सान्याल शर्मा का कहना है कि टीएसआई, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल की संख्या स्वीकृत पदों के सापेक्ष कम है, फिर भी यातायात व्यवस्था पूरी तरह चुस्त रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। होमगार्ड और पीआरडी के जवानों को एक-एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिलाकर यातायात व्यवस्था में लगाया गया है।
यातायात पुलिस में स्वीकृत पदों के सापेक्ष तैनाती कम है। लोगों की समस्या को देखते हुए रिक्त पदों पर तैनाती के लिए प्रयास किया जाएगा।
- धवल जायसवाल, एसपी