बीत गई मियाद, नहीं भरे जा सके सड़कों के गड्ढे
30 नवंबर तक शहर से लेकर देहात तक मार्गों को करना था गड्ढामुक्त
पडरौना। तीस नवंबर तक शहर से लेकर देहात तक की सभी सड़कों को सरकार ने गड्ढामुक्त करने का निर्देश दिया था, लेकिन गांव की कौन कहे, शहर में ही कई सड़कें जस की तस रह गई हैं। इनमें महिला थाना रोड, बलोचहां रोड, बाईपास रोड सहित अन्य मार्गों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। इससे राहगीर हिचकोले खाते घर पहुंचने को विवश हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया था कि जनपद की सड़कें 30 नवंबर तक गड्ढामुक्त करनी हैं। इस निर्देश का पालन जनपद में नहीं दिख रहा है। पीडब्ल्यूडी जनपद में 95 प्रतिशत सड़कों का गड्ढा भरने का दावा कर रहा है, जबकि धरातल पर कहीं दिख नहीं रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की बात दूर है, पडरौना शहर में ही गड्ढों की भरमार है। शहर के गायत्री मंदिर से महिला थाने जाने वाली सड़क पर हर दस मीटर पर गड्ढा ही गड्ढा है। मार्ग पर प्रतिदिन सैकड़ों वाहन आते जाते हैं। उन पर सवार लोग हिचकोले खाने पर विवश हैं। जटहां रोड से बिंदवलिया, मंसाछापर जाने वाली सड़क पर भी गड्ढे हैं। पडरौना शहर के अंबे चौक से बेलवा चुंगी जाने वाली सड़क, सदर कोतवाली से रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क, बलोचहां रोड, मोगलपुरा से छावनी मोहल्ले के रास्ते तहसील के निकट तक जाने वाली सड़क कई जगह खस्ताहाल है।
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन मृत्युंजय कुमार का कहना है कि शहर की वे सड़कें पीडब्ल्यूडी की नहीं हैं। महिला थाना जाने वाली सड़क भी पीडब्ल्यूडी की नहीं है। कुछ सड़कें नगरपालिका व कुछ अन्य विभागों की हैं। पीडब्ल्यूडी की जो सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो पाई हैं, वह प्रक्रिया में हैं। जल्दी गड्ढामुक्त हो जाएंगी।
राहगीर हो रहे घायल
शहर के रामकोला रोड निवासी अमर सिंह एक दिसंबर को अपनी बाइक लेकर महिला थाने की तरफ गए थे। इसी बीच वह गड्ढे की वजह से अनियंत्रित होकर गिर गए। निजी चिकित्सक से उनका इलाज कराया गया। इसी तरह सुभाष चौक निवासी अमरीश बेलवा चुंगी जा रहे थे। गड्ढे में बाइक का चक्का अचानक चले जाने से अनियंत्रित होकर गिर गए और घायल हो गए।
बोले राहगीर
मुख्यमंत्री ने सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश दिया था। इसका पालन जनपद के अधिकारी नहीं करा पा रहे हैं। सड़क पर गड्ढे हो जाने से आए दिन राहगीर इसमें गिर जाते हैं।
रामदयाल, त्रिलोकपुर
पडरौना शहर में गड्ढामुक्ति अभियान नहीं दिख रहा है। इससे बाइक सवार अनियंत्रित हो जाते हैं। इससे दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
धीरज यादव, खिरकिया
पीडब्ल्यूडी अपनी सड़क बनाकर वर्षों तक भूल जाता है। सरकार के निर्देश का पालन विभाग के लोग नहीं करते हैं। विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से कागजों में ही गड्ढामुक्ति अभियान चला है।
शैलेश गुप्ता, राहगीर, पड़री बढ़या छापर
सड़क के निर्माण के समय विभागीय अधिकारी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते हैं। ठेकेदार मनमाने तरीके से सड़क बना देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि सड़क जल्दी टूट जाती है और राहगीरों को आवागमन में दिक्कतें होती हैं।
सहाबुद्दीन, घोड़हवा, राहगीर
वर्जन
शहर में अधिकतर सड़कें के गड्ढों को भर दिया गया है। जहां बाकी है, वहां भी भरवाया जा रहा है। अन्य सड़कें पीडब्ल्यूडी की है।
विनय जायसवाल, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद, पडरौना