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कुशीनगर का हाल: जिला अस्पताल के SNCU में एक बेड पर तीन नवजात भर्ती, बढ़ रही है मरीजों की संख्या

Thu, 15 Sep 2022 11:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।

सार

जिला अस्पताल की एसएनसीयू में इलाज निशुल्क है। इस कारण यहां भर्ती होने वाले नवजातों की संख्या अधिक रहती है। जिला अस्पताल में पहले आठ बेड का ही एसएनसीयू संचालित होती थी, लेकिन इलाज में असुविधा को देखते हुए इसे न केवल अलग वार्ड में शिफ्ट किया गया, बल्कि वार्मर और फोटोथेरेपी मशीनों की संख्या भी बढ़ाई गई।
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जिला अस्पताल के एसएनसीयू में एक-एक बेड पर भर्ती तीन-तीन बच्चे। - फोटो : KUSHINAGAR
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विस्तार
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कुशीनगर जिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में नवजातों की संख्या इन दिनों काफी बढ़ गई है। इस यूनिट में 25 वार्मर और आठ फोटोथेरेपी मशीनें लगी हैं। इसके बावजूद एक-एक मशीन पर तीन-तीन बच्चों को भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। बुधवार को यहां 56 नवजात भर्ती थे। डॉक्टरों के तबादले के बाद उपलब्ध चिकित्सकीय स्टॉफ को अधिक समय तक ड्यूटी भी करनी पड़ रही है।
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निजी अस्पतालों की एसएनसीयू में भर्ती बच्चे के एक दिन के इलाज पर पांच से दस हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जिला अस्पताल की एसएनसीयू में इलाज निशुल्क है। इस कारण यहां भर्ती होने वाले नवजातों की संख्या अधिक रहती है। जिला अस्पताल में पहले आठ बेड का ही एसएनसीयू संचालित होती थी, लेकिन इलाज में असुविधा को देखते हुए इसे न केवल अलग वार्ड में शिफ्ट किया गया, बल्कि वार्मर और फोटोथेरेपी मशीनों की संख्या भी बढ़ाई गई। मौजूदा समय में 25 वार्मर और आठ फोटोथेरेपी से सुसज्जित हाईटेक एसएनसीयू संचालित हो रही है।

बुधवार को यहां 56 नवजात भर्ती कराए गए थे। यहां आवश्यकता के अनुरूप डॉक्टर तैनात नहीं हैं। करीब दो माह पहले शासन स्तर पर हुए तबादले में पीडियाट्रिशियन डॉ. सतीश सिंह, डॉ. गौतम शर्मा आदि डॉक्टर चले गए थे, तब से इलाज में दिक्कतें आ रही हैं।
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चार बेड पर एक डॉक्टर की होनी चाहिए तैनाती
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एसएनसीयू में चार बेड पर एक डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए। मौजूदा समय में एसएनसीयू के नोडल ऑफिसर डॉ. विजय कुमार सिंह, डॉ. नीरज पांडेय और डॉ. कृष्णमोहन प्रसाद की तैनाती है। डॉक्टरों की कमी की वजह से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश यादव और डॉ. एचएस राय ओपीडी, पीआईसीयू, एनआरसी, चाइल्ड वार्ड और इमरजेंसी के अलावा एसएनसीयू में भर्ती नवजातों का भी इलाज करते हैं।

एसएनसीयू में इस तरह के बच्चे किए जाते हैं भर्ती
एसएनसीयू में प्री मेच्योर, कम वजन, देर से रोने या नहीं रोने वाले बच्चे, संक्रमण सहित विभिन्न कारणों से अस्वस्थ बच्चों के अलावा जिसके पेट में गंदा पानी चला जाए, पीलियाग्रस्त और झटके वाले को भर्ती किया जाता है। ये नवजात जब तक पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते, तब तक इन्हें एसएनसीयू में चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाता है।

एसएनसीयू में नवजातों की संख्या काफी बढ़ गई है। इस वजह से एक-एक बेड पर एक से अधिक को भर्ती करना पड़ रहा है। स्थानांतरण के बाद बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या कम हो गई है। संविदा के कई डॉक्टरों की दूसरी जगह नियुक्ति हो जाने से भी पद रिक्त हुए हैं। डॉक्टरों की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। तब तक उपलब्ध डॉक्टरों की देखरेख में भी बच्चों का इलाज चल रहा है। नवजातों को संक्रमण से बचाने के लिए पूरी सावधानी बरती जा रही है।- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस
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