अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार
एक लाख रुपये नकद, 45 सिम, दस एटीएम कार्ड और 24 आधार कार्ड बरामद हुए
फर्जी सिम के सहारे भोले-भाले लोगों का खाता खुलवाकर साइबर अपराधियों को बेच देते थे
पडरौना। पुलिस ने भोले-भाले लोगों को लक्ष्य बनाकर उनके नाम से बैंक खाता खुलवाकर और उसे फर्जी सिम से लिंक कराकर खाता बेचने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। इनके कब्जे से पुलिस ने एक लाख रुपये नकद, 45 सिम, दस एटीएम और 24 आधार कार्ड बरामद हुए हैं। बरामदगी और गिरफ्तारी के आधार पर इनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जेल भेज दिया है।
एसपी धवल जायसवाल ने साइबर ठगों के इस गिरोह का खुलासा करते हुए बताया कि साइबर सेल एवं नेबुआ नौरंगिया थाने की संयुक्त टीम आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच-पड़ताल में जुटी थी। इस मामले में पुलिस ने जटहां बाजार थाना क्षेत्र के चिरगोड़ा कृपापट्टी हाल मुकाम नंदानगर थाना कैंट, गोरखपुर निवासी राजकुमार भारती, बिहार प्रांत के पश्चिमी चंपारण जिले के लौकरिया थाने के ग्राम रामपुर नीतीशनगर निवासी राजेश साहनी और खड्डा थाना क्षेत्र के बहेलिया (भुजौली बुजुर्ग) निवासी रामनाथ को गिरफ्तार किया गया है। एसपी ने बताया कि साइबर ठगों के कब्जे से एक लाख रुपये नकद, 45 फर्जी सिमकार्ड, विभिन्न बैंकों के दस एटीएम कार्ड, तीन मोबाइल फोन, अपराध मेञ प्रयुक्त एक बाइक, 24 आधार कार्ड, दो पासबुक और एक चेकबुक बरामद हुआ है। इनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है। एसपी ने बताया कि इन्हें गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये पुरस्कार दिया गया है।
ऐसे करते थे अपराध
एसपी धवल ने बताया कि ये साइबर ठग गरीब एवं भोलेभाले लोगों को पैसे का लालच देकर भिन्न-भिन्न बैकों में खाता खुलवाते हैं। उस खाते में विजय कुशवाहा एवं राजकुमार की ओर से उपलब्ध कराए गए फर्जी सिम को लिंक कराकर खाते का पासबुक व एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते थे। उसके बाद खातों को साइबर अपराधियों या हैकरों को आठ हजार रुपये में बेच देते थे। खोले गए खाते में तत्काल एसबीआई योनो एक्टिवेट करने के लिए साइबर अपराधी चार हजार रुपये खाते में जमा कराते थे। इसके बाद तुरंत बैंक शाखा से खाते का नेटबैंकिंग यूजर नेम व पासवर्ड प्राप्त हो जाने पर उसकी सहायता से एसबीआई योनो एक्टिवेट कर लेते थे। फिर उसके यूजर नेम व पासवर्ड का स्क्रीनशॉट या लिंक, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड साइबर अपराधियों को भेज देते थे। इसमें साइबर अपराधियों या हैकरों की ओर से अवैध रूप से ऑनलाइन लाखों रुपये ट्रांसफर करके निकाल लिया जाता था। खाते में अत्यधिक लेन-देन हो जाने पर जब बैंक से अधिक लेन-देन का नोटिस आता था तो उस खाते में पैसा ट्रांसफर करना बंद कर देते थे। पुन: दूसरे लोगों को लालच देकर उनका खाता खुलवाते थे।