कुशीनगर। जिला अस्पताल में मरीज माफिया की सक्रियता की सूचना पर शनिवार को एसडीएम सदर ने छापा मारा। अस्पताल से महिला सहित तीन दलालों को पकड़ा गया। अचानक हुई कार्रवाई से अस्पताल में भगदड़ मच गई। पुलिस व प्रशासनिक टीम की सख्ती देख अन्य दलाल भाग निकले। पकड़े गए दलालों के खिलाफ केस दर्ज किया गया और तीनों को जेल भेज दिया गया है।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जिला अस्पताल में दलालों के सक्रिय होने की सूचना पर एसडीएम व पुलिस की एक टीम तैयार की। टीम ने शनिवार सुबह नौ बजे एसडीएम सदर महात्मा सिंह के नेतृत्व में जिला अस्पताल में छापा मारा। एसडीएम और रवींद्रनगर धूस के इंस्पेक्टर राजेश कुमार मिश्रा ने एक महिला सहित तीन दलालों को दबोच लिया। पकड़े गए दलालों में चौपरिया का राजीव मिश्रा, सुगही का अजीत पटेल और बसडीला की बिजवंता देवी शामिल हैं। पुलिस ने तीनों पर केस दर्ज कर जेल भेज दिया। एसडीएम सदर महात्मा सिंह ने बताया कि सुबह का समय होने के कारण भीड़ कम थी और बिचौलिए भी कम आए थे। तीन पकड़े गए हैं। बाकी की गिरफ्तारी के लिए फिर छापा मारा जाएगा।
जिला अस्पताल में कुछ स्वास्थ्यकर्मियों की सांठगांठ से दलाल सक्रिय रहते हैं। ये दलाल अस्पताल की व्यवस्था की खामियों को बढ़ाचढ़ाकर मरीजों और उनके तीमारदारों को बताते हैं। इसके बाद मरीज को निजी अस्पताल में ले जाते हैं। निजी अस्पताल में मरीजों का इलाज के नाम पर शोषण किया जाता है।
जिला अस्पताल प्रशासन दलालों के गिरोह पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। पहले भी मजिस्ट्रेट के छापे में 12 दलाल पकड़े गए थे। सभी को जेल भेजा गया था। इसके बाद कुछ दिनों तक दलालों की सक्रियता कम रही, लेकिन बाद में फिर सभी सक्रिय हो गए।
पहले ही तैयार कर ली थी दलालों की कुंडली
कुशीनगर। जिला अस्पताल मरीज माफियाओं के चंगुल है। इसकी जानकारी होने पर एसडीएम ने अपने कर्मचारियों के जरिए दलालों को चिह्नित कराया। उनकी पूरी कुंडली तैयार कर ली। इसके बाद शनिवार को पुलिस के साथ छापा डाला। छापा डालने के दौरान सावधानी बरती, ताकि दलाल भाग न जाएं। टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने सादे कपड़े पहने थे। वहीं सभी निजी गाड़ियाें से अस्पताल पहुंचे। एसडीएम ने अब तक तीन बार छापा डाला है। जिसमें कुल 23 दलालों को जेल भेज चुके हैं।
जिला अस्पताल वर्षों से बिचौलियों का गढ़ बना हुआ है। सस्ते इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीजों व तीमारदारों को यह आसानी से शिकार बना रहे हैं। मरीजों व तीमारदारों को अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे व जांच जल्द काने का झांसा देकर रुपये वसूला जाता है। तो अस्पतालकर्मियों की मिलीभगत दवाओं को बाहर की दुकानों से खरीदवाते हैं। जिसके बदले में मोटा कमीशन हासिल करते हैं। जिला अस्पताल प्रबंधन को इस गिरोह के बारे में पूरी जानकारी है। पर, वह अंकुश लगाने में पूरी तरह से असफल रहा। जानकारी जिलाधिकारी से साझा की। इसके बाद एसडीएम सदर महात्मा सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। टीम ने बड़ी ही सावधानी से छापा डाला। जिसमें तीन दलाल गिरफ्त में आए।
अब तक 23 को भेज चुके हैं जेल
एसडीएम सदर महात्मा सिंह ने बताया कि अस्पताल में दलाल सक्रिय है। इस गिरोह को कुछ कर्मचारी भी मदद करते हैं। ऐसे कर्मचारियों को भी चिह्नित किया जा रहा है। उनकी कुंडली तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि दो साल के अंदर तीन बार छापा डाला है। इसमें पहली बार में 9, दूसरी बार 11 और शनिवार को तीसरी बार डाले गए छापे में 3 दलालों को पकड़ा। एसडीएम को इस बात का मलाल था कि छापा डालने के लिए टीम कुछ पहले ही पहुंच गई। जिसके कारण कई दलाल गिरफ्त में नहीं आ सके। इन सभी की तलाश की जा रही है। जल्द ही सभी को जेल भेज दिया जाएगा।
सुविधा दिलाने के नाम पर वसूली
जिला अस्पताल में सक्रिय दलाल भीड़ में शामिल हो जाते। वह मरीजों से उनकी परेशानी पूछते हैं और अपनी भी बताते है। ताकि उनको विश्वास में लिया जा सके। अपनी पहचान बताकर पर्ची को डॉक्टर तक पहुंचा देते हैं। लाइन में खड़े मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रह जाते हैं। रुपये लेकर दलाल कर्मचारियों की मदद से कुछ मरीजों को डॉक्टर को दिखा देते हैं।
निशुल्क जांच के भी ले लेते हैं रुपये
जिला अस्पताल में जांच निशुल्क है। फिर चाहे अल्ट्रासाउंड हो या एक्सरे अथवा पैथालॉजी जांच, लेकिन मरीजों को अधिक पर्चियां और देर होने का बहाना बनाकर अपने झांसे में ले लेते हैं। उसके बाद उनसे रुपये तय करके जैसे-तैसे पर्ची पहुंचा देते हैं। अंदर बैठे कर्मचारी उनकी मंशा समझ जाते हैं और जांच जल्दी कर देते हैं। इसके बदले में रुपये वसूले जाते हैं।
दवा की दुकानों से मिलता है कमीशन
अस्पताल की फार्मेसी पर तैनात कर्मचारी व दलालों की मिली भगत खूब चलती है। कर्मचारी दवा न होने की बात कहकर वापस भेजते हैं। वहीं दलाल बाहर से सस्त दवा दिलाने के नाम पर बाहर मेडिकल स्टोर पर ले जाते हैं। जहां दवा दिलाने के बदले में इन दलालों को मोटा कमीशन मिलता है। कई मरीजों की ऐसी दवाएं भी खरीदवाते हैं जो पर्चे पर लिखी तक नहीं रहती है।
गिरोह में महिलाएं सबसे आगे
जिला अस्पताल में पुरुष ही नहीं, महिलाएं भी इस गिरोह की सक्रिय सदस्य हैं। वे महिलाओं के बीच पहुंचकर उन्हें अपनी बातों में फंसा लेती हैं और दवाइयां बाहर की खरीदवाने के लिए समझा लेती हैं। महिलाएं अक्सर जांच होने पर भागने वालों में सबसे आगे होती हैं। शनिवार को डीएम उमेश मिश्रा के निर्देश पर एसडीएम सदर महात्मा सिंह का छापा पड़ा तो अधिकतर महिलाएं और बिचौलिए भागने में सफल रहे।
जिला अस्पताल का मेडिकल कॉलेज में विलय हो जाने के कारण अभी सभी कार्य उस तर्ज पर हो रहे हैं। दलालों की सक्रियता पर पूरी तरह लगाम लगाया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मियों को उन्हें चिह्नित करने का निर्देश दिया गया है। जो भी पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ केस दर्ज कर जेल भिजवाया जाएगा।
-डॉ. आरके शाही, प्राचार्य
इस टीम ने की कार्रवाई
जिला अस्पताल में पड़े छापे में एसडीएम सदर महात्मा सिंह, सीओ उमेश चंद्र भट्ट, थानाध्यक्ष रविंद्रनगर राजेश मिश्रा, नगर लेखपाल योगेंद्र गुप्ता, अग्निवेश पांडेय, संतोष गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।