- सीएमएस के सामने मंगलवार को हुई कहासुनी, दरोगा ने कहा जांच में टालमटोल कर रहे चिकित्सक
- डेड़ माह पूर्व सीएमओ के निर्देश पर गठित हुआ था तीन डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड
- निजी अस्पताल में इलाज के दौरान गर्भ में बच्चे को मारने और बच्चेदानी निकालने का मामला
पडरौना। निजी अस्पताल में इलाज के दौरान गर्भ में बच्चे को मारने और बच्चेदानी निकालने के मामले में अभी तक महिला की चिकित्सकीय जांच नहीं हो सकी। डेढ़ महीने से महिला को लेकर विवेचक दरोगा मेडिकल कालेज से सिविल अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार के दरोगा का भी सब्र टूट गया। महिला को लेकर पहुंचे दरोगा की डॉक्टर से सीएमएस के सामने उनके कार्यालय में ही कहासुनी हो गई। दरोगा ने जांच में देरी का कारण लिखित में मांगा। तो डॉक्टर भड़क गया। तीन घंटे तक सीएमएस कार्यालय का माहौल तनावपूर्ण रहा। इसके बाद डॉक्टरों ने महिला की जांच को गोरखपुर बीआरडी मेडिकल काॅलेज रेफर कर दिया।
बरवापट्टी थाना क्षेत्र के गौरीशुक्ल गांव निवासी दिनेश की पत्नी नीतू गर्भवती थी। दिक्कत होने पर दिनेश इलाज के लिए सेवरही थाना क्षेत्र के जनता अस्पताल में लेकर गया। आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन लगा दिया। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। बच्चे को निकालने के दौरान डॉक्टर ने बच्चेदानी भी निकाल दी। इसकी वजह से नीतू की तबीयत काफी बिगड़ गई। कसया के एक निजी अस्पताल में एक महीने तक इलाज कराने के बाद तबीयत में सुधार हुआ। दो महीने पहले पीड़ित की तहरीर पर सेवरही पुलिस ने जनता अस्पताल के डॉक्टर सुधांशु शाह और इसकी पत्नी डॉ. मनीषा पर केस दर्ज किया। बिना रजिस्ट्रेशन संचालित अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया था। पुलिस की अर्जी पर सीएमओ ने सीएमएस को मेडिकल बोर्ड बनाकर महिला का चिकित्सकीय परीक्षण का निर्देश दिया। टीम में जिला अस्पताल के डॉ. उपेंद्र चौधरी, सर्जन डॉ. बीरेंद्र कुमार और डॉ. नीलकमल को शामिल किया गया।
डेढ़ महीने में 14 बार महिला को लेकर गई पुलिस
मेडिकल बोर्ड बनने के बाद पुलिस महिला को लेकर जांच के लिए पहुंची। इस मामले में चिकित्सकों का रवैया लगातार टालमटोल का रहा। दरोगा के मुताबिक डेढ़ महीने में 14 बार नीतू को लेकर मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल गये। पर जांच की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।मंगलवार को सेवरही के दरोगा आशुतोष जायसवाल पीड़ित महिला को लेकर सीएमएस कार्यालय पहुंचे। सीएमएस डॉ. एचएस राय से मिलकर दरोगा मेडिकल रिपोर्ट में देरी की वजह की लिखित जानकारी मांगने लगा। सीएमएस ने मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टरों को कॉल कर बुलाए। इस दौरान दरोगा और डॉक्टरों के बीच बहस होने लगा। सर्जन ने मेडिकल की कार्रवाई पूरा होने का दावा किया। सीएमएस ने जब फाइल तलब किया तो बाबू की गलती सामने आई। टीम ने मेडिकल बना दिया था। बच्चेदानी निकली है या नहीं इसके लिए सिटी ऑफ डोमेन की जांच होना है, जो यहां नहीं होगा। इसके लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में होगा। बाबू ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का रेफर कागज नहीं तैयार किया था। इसकी वजह से मामला अधर में लटका था।
मेडिकल रिपोर्ट के कारण अटकी चार्जशीट
दरोगा आशुतोष जायसवाल ने बताया कि आरोपी डॉक्टरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। मेडिकल रिपोर्ट विवेचना का मुख्य पार्ट है। डेढ़ माह में 14 बार मेडिकल कराने के लिए सिपाही महिला को लेकर जिला अस्पताल आ चुकी है। लेकिन मेडिकल की कार्रवाई अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके चलते विवेचना पूरा नहीं हो पा रहा है। इस कारण चार्जशीट दाखिल नहीं हो पा रही है। इस लिए मेडिकल रिपोर्ट में लिखित जानकारी मांग रहा था।
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बाबू की गलती के कारण पीड़ित महिला को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज जांच के लिए रेफर नहीं किया जा सका था। मेडिकल बोर्ड के सभी डॉक्टरों को बुलाया गया। फाइल अवलोकन के दौरान जो कमी मिली। उसे ठीक कर जांच के लिए महिला को रेफर कर दिया गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद मेडिकल रिपोर्ट दे दिया जाएगा। डॉक्टर और दरोगा के बीच कहासुनी हुई थी।
डॉ. एचएस राय, सीएमएस जिला अस्पताल