- मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और ओडीओपी के आवेदकों के प्रति उदासीन हैं जिले के बैंक
- करीब सात करोड़ रुपये लोन लेने के लिए विभिन्न बैंकों के चक्कर लगा रहे 73 आवेदक
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। बैंकों की निष्क्रियता से जिले में उद्योगों के विकास का पहिया थम गया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत सात लाख से अधिक रुपये का ऋण लेने के लिए जिले के 73 और ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के लिए 99 लाख रुपये ऋण के लिए 14 आवेदक भटक रहे हैं। यदि समय से आवेदकों को ऋण मिल जाता तो उद्योगों की स्थापना में तेजी आती और सात सौ से अधिक लोगों को रोजगार मिलता। अग्रणी बैंक के जिला प्रबंधक सुनील त्यागी ने बताया कि पूर्ण आवेदनों पर कार्रवाई की गई है। अन्य की जांच करके आवेदकों को ऋण मुहैैया कराने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
जिले में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत कुल 141 लोगों ने आवेदन किया है। इनमें जिले के विभिन्न बैंकों से केवल 68 आवेदकों का ही ऋण स्वीकृत हो सका है, जिनको बैंक की तरफ से 529.09 लाख रुपये का ऋण दिया गया है। इन लाभार्थियों को सरकार की तरफ से 132.28 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। इसी तरह एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत आवेदन किए कुल 27 आवेदकों में महज 13 आवेदकों का ही ऋण बैंकों ने स्वीकृत करके 66.50 लाख रुपये की सहायता दी है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ऋण के लिए हुए 73 लोगों का आवेदन लंबित है। इन आवेदकों ने कुल 7773.4 लाख ऋण लेने के लिए आवेदन किया है। इनका आवेदन यदि बैंक स्वीकृत कर दें तो उन्हें 193.166 लाख रुपये शासन की तरफ से अनुदान मिलता। इससे वह आसानी से उद्योग लगाकर कारोबार शुरू कर देते। इसी तरह एक जिला एक उत्पाद के तहत 14 आवेदकों की फाइल बैंक में लंबित है। इन आवेदकों ने कुल 99.75 लाख रुपये ऋण लेने के लिए आवेदन किया है।
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मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत सीमेंट की ईंट बनाने के लिए सात लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया है। इसकी स्वीकृति के लिए बीते दो माह से बैंक के चक्कर लगा रहा हूं। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। - उज्जवल गुप्ता, निवासी छितौनी
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मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत नमकीन बनाने की फैक्ट्री लगाने के लिए आवेदन किया था। ऋण स्वीकृत कराने के लिए बीते दो वर्ष से बैंक का चक्कर लगा रही हूं। कई बार बैंक समेत अन्य उच्चाधिकारियों से भी मिल कर शिकायत कर चुकी हूं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। - नीतम राव, हाटा
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मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना समेत अन्य योजनाओं में ऋण के लिए आवेदन करने वाले सभी आवेदकों की विभागीय प्रक्रिया पूरी कर संबंधित बैंकों में भेजवा दी जाती है। इसके बाद विभाग की तरफ से ऋण स्वीकृति कराने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
- सतीश कुमार, उपायुक्त, जिला उद्योग एवं प्रोत्साहन केंद्र, कुशीनगर।
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आवेदकों के आवेदन की जांच की जाती है। मानक पूरे करने वाले आवेदकों का ऋण स्वीकृत किया जाता है। किसी तरह की कमी होने पर उसे दुरूस्त करने में समय लगता है। इससे कई बार विलंब होता है।
- सुनील त्यागी, प्रबंधक, जिला अग्रणी बैंक, कुशीनगर