मौसम दे रहा दगा, घटा गन्ने का रकबा
इस साल जिले में 86 हजार हेक्टेयर में हुई है खेती
पडरौना। तीन वर्षों से कभी अतिवृष्टि तो कभी कम बारिश की वजह से गन्ने के क्षेत्रफल में निरंतर गिरावट आ रही है। इस साल गन्ने का उत्पादन 86 हजार हेक्टेयर में सिमट गया है, जो पिछले साल से भी कम है।
पिछले दो साल में हुई अत्यधिक बारिश से गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। उस बारिश ने गन्ना किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा। फसल में उकठा व रेडरॉट रोग लग गए। इससे काफी मात्रा में फसल बर्बाद हो गई थी।
पेराई सत्र 2020-21 में जिले में 91,117 हेक्टेयर में गन्ना की खेती हुई थी। इनमें से 9,330 हेक्टेयर गन्ने की फसल खेतों में पानी भर जाने से सूख गई थी। पिछले पेराई सत्र में 87,519 हेक्टेयर में खेती हुई थी, लेकिन अतिवृष्टि के कारण 16 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल सूख गई थी।
इस साल भी गन्ने के क्षेत्रफल में गिरावट हुई है। क्योंकि शुरुआती दौर में बारिश बेहद कम हुई। लिहाजा गन्ने का क्षेत्रफल घटकर 86 हजार हेक्टेयर हो गया। पूंजी लगाने के बावजूद किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे चीनी मिलें पेराई भी जल्द बंद कर सकती हैं।
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गन्ना किसानों की संख्या 1.70 लाख है।
खेती का क्षेत्रफल 86 हजार हेक्टयेर है।
खेती वाले गांवों की संख्या 1570 है।
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कोट
पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष गन्ने की खेती कम हुई है। पूर्व के दो वर्षों में गन्ने की फसल को अत्यधिक बारिश के चलते तो इस साल बारिश कम होने से नुकसान पहुंचा है। किसानों को मौसम का साथ नहीं मिलने के कारण गन्ने का रकबा नहीं बढ़ पा रहा है।
-दिलीप सैनी, डीसीओ
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पहले दस एकड़ क्षेत्रफल में गन्ने की खेती करता था। अब चीनी मिल से मिलने वाला बीज यहां की मिट्टी के अनुकूल नहीं है। अगेती और सामान्य प्रजाति का गन्ना चीनी मिल ने लेना बंद कर दिया है। इस साल केवल सात एकड़ में गन्ने की खेती की है।
-ओमप्रकाश सिंह, सिकटिया
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पिछले तीन वर्षों से मौसम गन्ने के अनुकूल नहीं रहा है, इसलिए गन्ने की खेती में मन नहीं लग रहा है। पहले गन्ने की बुआई अधिक करता था, लेकिन इस साल केवल दो एकड़ खेत में ही गन्ने की खेती की है।
सतीश राय, विशुनपुर बरियापट्टी