-शांति कमेटी की बैठक में प्रधान ने विवाद नहीं होने का दिया आश्वासन
-दो साल से गांव में डोल जुलूस के दौरान हो रहा विवाद, गांव में पीएचसी तैनात
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। सोहरौना गांव पुलिस की सूची में अतिसंवेदनशील है, गांव में डोल जुलूस भ्रमण के दौरान सिर्फ चार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। डोल पर कचरा गिरने के बाद पुलिसकर्मी मामला सुलझाने के बजाय वहां से खिसक गए और थानाध्यक्ष को जानकारी दी। इतनी देर में दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए और बात इतनी बढ़ गई कि पुलिस को डैमेज कंट्रोल करने में पूरे दिन गुजर गए। गांव वालों की मानें तो पुलिस अगर शुरू में सक्रिय हुई होती तो शायद बात आगे नहीं बढ़ी होती।
ग्राम प्रधान समेत चार लोगों पर कार्रवाई से एक समुदाय के लोगों में नाराजगी है, वहीं दूसरे समुदाय के लोगों ने पुलिस प्रशासन पर जबरन डोल को मेले में ले जाने का आरोप लगा रहे हैं। गांव में तनाव को देखते हुए स्थानीय पुलिस के अलावा पीएचसी तैनात कर दिया गया है। दूसरे दिन भी मिश्रौली चौराहा पर विवाद की चर्चा रही। पूर्व में डोल जुलूस में हुए विवाद के बाद मिश्रौली के डोल मेले पर पुलिस-प्रशासन की खास नजर रहती है। इसके बावजूद रामकोला पुलिस माहौल को भांप नहीं पाई और हल्के में लेते हुए सोहरौना गांव में डोल जुलूस भ्रमण के दौरान सिर्फ चार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई, जिसका नतीजा रहा कि मामूली बात को लेकर उपजे विवाद में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मामला बढ़ता देख जुलूस में शामिल पुलिसकर्मियों ने मामला शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की संख्या कम होने के कारण तनाव बढ़ गया। इसका नतीजा यह रहा कि मंगलवार की देर शाम तक तनावपूर्ण स्थिति रही और मिश्रौली का डोल मेला फीका पड़ गया।
बुधवार को दिन में करीब 1:00 बजे गांव में जाने वाली सड़कों पर सन्नाटा था। डोल संघ के अध्यक्ष अखिलेश तिवारी के साथ करीब दस लोग बैठकर आपस में चर्चा कर रहे थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि पुलिस की सुस्ती के चलते बात और बढ़ गई। पुलिस एक पक्ष के लोगों पर दबाव बना रही थी। गांव का कोई भी सदस्य डोल को हाथ तक नहीं लगाया, दूसरे गांव से आए कुछ लोग पुलिस के कहने पर डोल उठाकर मिश्रौली मिले में लेकर चले गए, इसके चलते डोल गांव के अधिकांश लोगों के दरवाजे पर नहीं पहुंचा और न ही पूजा हो सका। पिछले साल भी छत से डोल जुलूस पर कांटी और सड़क पर शीशा फोड़ दिया गया था, लेकिन गांव वालों के आपसी बातचीत से मामला शांत हो गया।
अखिलेश तिवारी ने बताया कि गांव के दूसरे समुदाय के कुछ युवक प्रधान के जेल से रिहा होकर आने पर मारने-पीटने की धमकी दे रहे हैं। वहीं जिस स्थान पर डोल रखा गया था। उस स्थान और पंचायत भवन पर पीएसी तैनात कर दी गई है। गांव में भ्रमण कर पुलिसकर्मी माहौल को भांप रहे हैं। हालांकि पूरे मामले की जांच एसपी संतोष कुमार मिश्रा अपने स्तर से करा रहे हैं, आखिर कहा से चूक हुई कि बात इतनी बढ़ गई।
गांव में डोल जुलूस की परंपरा काफी पुराना है। किसी का कोई विरोध नहीं रहता है। किसी न किसी बात को लेकर मामला बिगड़ जाता है। इसमें पुलिस की लापरवाही है। प्रशासन अगर सक्रिय रहती तो विवाद नहीं बढ़ा होता। गांव का माहौल सामान्य है।
-मजिउल्लाह सोहरौना
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डोल जुलूस जिस रास्ते से लोग लेकर जाने की बात कह रहे थे, उस रास्ते से कभी डोल गया नहीं है। इस पर भी कोई आपत्ति नहीं थी। पुलिस खुद नई परंपरा का विरोध करते हुए उस रास्ते से डोल जाने से रोक दिया था। डोल पर कचरा फेंकना गलत है। इसकी प्रशासन निष्पक्ष तरीके से जांच करें।
-रशीद
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गांव में वर्ष 1992 से डोल जुलूस निकलता है। जिस रास्ते को प्रशासन नया रास्ता बता रहा है। उस रास्ते से कई बार डोल निकला है। पुलिस की लापरवाही से हर साल विवाद होता है। इसके चलते मिश्रौली का मेला फींका पड़ जाता है।
-पं. प्रहलाद तिवारी
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-गांव में किसी के दरवाजे पर डोल नहीं पहुंचा और न ही पूजा हुआ। इसके चलते कई घरों में रात को चूल्हा तक नहीं जला। प्रशासन पूरी घटना की जांच कराए । पुलिस की लापरवाही से बात इतनी बढ़ी। इसका पूरे गांव के लोगों का कष्ट है।
-उदयनरायण तिवारी
गांव में शांति व्यवस्था के लिए स्थानीय पुलिस के अलावा पीएचसी तैनात कर दी गई है। गांव की एक-एक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। डोल जुलूस के दौरान हुए विवाद की विभागीय जांच कराई जा रही है।
-संतोष कुमार मिश्र एसपी
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पुलिस की चूक से सोहरौना गांव से बढ़ा था विवाद, पीएसी तैनात
-सोहरौना गांव में पुलिस की लापरवाही से विवाद हुआ। संवेदशील गांव में डोल जुलूस भ्रमण के दौरान सिर्फ चार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इस लिए डोल पर कचरा गिरने के बाद माहौल बिगड़ गया और पुलिस वाले संभाल नहीं पाए। बाद में फोर्स पहुंची तो मामला बढ़ चुका था। दूसरे दिन भी गांव का माहौल तनावपूर्ण दिखा। गांव के पंचायत भवन पर पीएचसी तैनात है।