आग में सबकुछ तबाह होने के बाद भीषण गर्मी में पीड़ित प्लास्टिक के नीचे दिन गुजर रहे हैं। मंगलवार की रात गांव के प्राथमिक विद्यालय और पंचायत भवन में कट गई, लेकिन बुधवार की सुबह जैसे-जैसे तापमान बढ़ता गया, अग्निपीड़ितो का दर्द भी बढ़ता गया। प्लास्टिक के नीचे गुमसुम बैठी पूनम और ज्ञांती ने बताया कि इस आग ने हम लोगों का सबकुछ छीन लिया। दूसरों के पक्के मकानों या पेड़ों की छांव के नीचे बैठकर दिन गुजारना पड़ रहा है। धूप में प्लास्टिक के नीचे बैठी रीमा ने बताया कि इस प्लास्टिक के नीचे रहने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। अब दूसरा आशियाना बनाना आसान नहीं है।
राख की ढेर में ढूंढ रहे गहने, पासबुक व आधारकार्ड
भीषण आग में सबकुछ खो चुके लोगों के पास तन के कपड़ों को छोड़कर कुछ नहीं बचा है। बुधवार को लोग राख के बीच गहने, पासबुक और आधार कार्ड खोजने में लगे हुए थे। बिना पासबुक और आधार कार्ड के पीड़ितों को सरकारी लाभ भी मिलना मुश्किल है। राधाकृष्ण, मोहन, जोगिंद्र ने आदि बताया कि आग में सबकुछ तबाह हो गया है। लोग सुबह से ही राख में उम्मीद पाले खोजबीन जारी रखे थे।
बिटिया की शादी के लिए मोहर कई महीने से एक-एक रुपये जोड़ रहे थे, लेकिन मंगलवार को लगी आग में गृहस्थी के साथ सबकुछ जलकर राख हो गया। एक सपना था कि बेटी अनीता की शादी वह धूमधाम से करेंगे, लेकिन उस अरमान पर भी पानी फिरता दिख रहा है।
बाजूपट्टी गांव में एक पेड़ की छांव के नीचे परिवार के साथ गुमसुम बैठे मोहर राजभर रो रहे थे। उन्होंने बताया कि जून के पहले सप्ताह में बेटी अनीता की शादी होनी थी। शादी धूमधाम से करने की इच्छा थी। कई महीने से शादी की तैयारी की जा रही थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक झटके में सबकुछ जलकर राख में तब्दील हो गया। उन्होंने बताया कि 20 हजार रुपये के कपड़े, करीब 80 हजार रुपये के गहने, बेटी को देने वाला बेड, सिलाई मशीन समेत नकद भी इस आग में जलकर नष्ट हो गया। उनका कहना था कि अब तो रहने के लिए आशियाना नहीं है। पहले आशियाना बनाया जाएगा, लेकिन बेटी की शादी कैसे होगी यह समझ नहीं आ रहा है।