कुशीनगर। सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से निजी अस्पतालों का फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन का खेल जारी है। इसमें डॉक्टर के बारे में गलत जानकारी देकर कागजात तैयार कर दिए जा रहे हैं। मरीजों को ठगने के मामले में स्टिंग ऑपरेशन के बाद एक अस्पताल ने गोरखपुर के जिस डॉक्टर का नाम बताया था वह वर्षों से कुशीनगर आया ही नहीं है। यही नहीं उस डाॅक्टर को इसके बारे में कोई जानकारी भी नहीं है। इसके बाद भी उसके नाम से रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। सीएमओ अनुपम प्रकाश भाष्कर का कहना है कि यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। जिले में इसके पूर्व देहरादून के डॉक्टर की डिग्री के इस्तेमाल होने का मामला पकड़ा जा चुका है। यदि इसकी जांच कराई जाती है तो कई और मामले सामने आ सकते हैं। फिलहाल स्टिंग ऑपरेशन के मामले में रक्षक हास्पिटल सोहरौना, एमएस हास्पिटल सोहरौना, कृष्णा ट्रामा सेंटर, न्यू सिटी हब छावनी, दीनदयाल हास्पिटल कसया, फरहान हास्पिटल तमकुहीराज की जांच जारी है। अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन में पहले से फर्जीवाड़े का खेल जारी है। तत्कालीन सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया के कार्यकाल में आने वाले आवेदनों की बिना जांच किए ही रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता था। नामी गिरामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर संचालक मरीजों को भ्रम में डालकर इलाज कर मोटी रकम भी ऐंठते थे। सीएमओ कार्यालय में तैनात पटल बाबू्, एक संविदा पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर और मलेरिया विभाग के एक इंस्पेक्टर का नाम इस खेल में सामने आ चुका है। सूत्रों की मानें तो निजी अस्पताल या अल्ट्रासाउंड, पैथाेलॉजी का पटल देखने वाला बाबू सिर्फ नाम का है, बाकी यही दोनों कर्मचारी इस खेल में शामिल रहते हैं। कई अल्ट्रासाउंड सेंटरों में पार्टनर भी होने की इनकी चर्चा है। गोरखपुर के रहने वाले डा. वीरेंद्र बहादुर सिंह चरगांवा के हेल्थ केयर करीम नगर में निजी प्रैक्टिस करते हैं। वह जीवन रक्षक हास्पिटल का नाम भी नहीं सुने हैं। पडरौना आए भी उन्हें वर्षों हो गए हैं, लेकिन इनकी डिग्री पर आखिल अस्पताल का रजिस्ट्रेशन हो गया। डा. वीरेंद्र का कहना है कि इसके पूर्व भी कप्तानगंज कस्बे में एक अल्ट्रासाउंड सेंटर का रजिस्ट्रेशन इनके नाम पर किया गया था। इसकी शिकायत करने के बाद सीएमओ कार्यालय की ओर से सील किया गया था। आखिर किसने डिग्री का इस्तेमाल किया और कहां से डिग्री मिली।