फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: तस्करों की तरकीब के आगे फेल हो रही तकनीक...फीकी पड़ी पुलिसिया तफ्तीश

Tue, 27 Feb 2024 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
-आगामी चुनाव और त्योहारों के मद्देनजर शराब तस्करी रोकना बिहार-यूपी पुलिस के लिए चुनौती
विज्ञापन

-तस्करी रोकने के लिए पांच दिन पहले छह जिलों के अफसरों ने पडरौना में की थी बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। हरियाणा, पंजाब के रास्ते दिल्ली होते हुए यूपी और फिर बिहार में दस्तक देने वाले तस्करों के आगे न केवल पुलिसिया तफ्तीश फीकी पड़ रही है, बल्कि शराब तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगी तकनीक (हैंड स्कैनिंग मशीन) भी धोखा खा जा रही है। तस्कर अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंच जा रहे हैं। न केवल कुशीनगर पुलिस इन तस्करों के कारनामों से उलझी है बल्कि, बिहार पुलिस की तकनीक भी मास्टरमाइंड के आगे फेल होती नजर आ रही है।
आसन्न लोकसभा चुनाव और होली त्योहार में शराब की बिक्री रोकने के लिए पुलिस सक्रिय हो गई है। बंदी के बावजूद चोरी-छिपे बिहार में पहुंचाई जा रही शराब पर अंकुश लगाने के लिए गोपालगंज के एसपी स्वर्ण प्रभात कई बार बिहार-यूपी की सीमा का दौरा कर चुके हैं। तस्करी को चुनौतीपूर्ण मानते हुए जिले में एक सप्ताह के अंदर दो बार अफसरों की बैठक हो चुकी है। तीन दिन पहले तमकुहीराज में बिहार और यूपी के अफसरों की बैठक हुई, इसमें देवरिया के भाटपाररानी और सलेमपुर सर्किल की पुलिस और अधिकारी मौजूद रहे। बीते शनिवार को भी आबकारी विभाग की संयुक्त बैठक पडरौना में हुई। इसमें भी बिहार में जाने वाले अवैध शराब को पर रोक लगाना मुद्दा रहा। इसमें शराब की अधिकतम खुदरा मूल्य के अलावा सीमावर्ती मुख्य मार्ग, ग्रामीण मार्ग व नदी मार्ग पर टीम बनाकर कर निगरानी करने और तस्करों का चेन तोड़ने की योजना बनी। इसमें बिहार के बेतिया, सिवान, गोपालगंज तथा यूपी के देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर के आला अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन



पूर्वांचल के सरहदी क्षेत्र शराब तस्करी के लिए मुफीद
-अन्य राज्यों से लाकर बिहार में शराब खपाने के लिए सड़क मार्ग, हाईवे सुगम हैं तो सीमावर्ती क्षेत्र के गांव, गली और पगडंडी भी मददगार साबित होते हैं। हरियाणा, पंजाब क्षेत्र से आने वाली शराब पूर्वांचल के कुछ जिलों के रास्ते ही बिहार पहुंचती है। इसमें सोनभद्र, चंदौली के जंगल के रास्ते, कर्मनाशा नदी, गाजीपुर के गहमर का इलाका, गंगा नदी का किनारा और बलिया का भरौली क्षेत्र, देवरिया के मेहरौना, बनकटा के रामपुर बुजुर्ग, पकहा तो कुशीनगर का खड्डा क्षेत्र, तमकुही का बरवापट्टी, अहिरौली दान, अमवाखास, कटेया का बनकटा और सलेमगढ़, तरयासुजान क्षेत्र अवैध तस्करों के लिए सुगम माना जा रहा है। इस रास्ते बिहार तक शराब की खेप भेजी जाती है। यूपी से बिहार की सीमा से घुसने पर पहले केवल एक चेकपोस्ट एनएच-28 पर बलथरी था। लेकिन, 2022 में बिहार मद्य निषेध विभाग ने ग्रामीण सड़कों पर भी सात अन्य चेकपोस्ट बना दिए। इसमें कुशीनगर और देवरिया से जुड़ी सीमा कटेया थाने के पकहा, भागीपट्टी, समउर, भोरे थाना क्षेत्र के भेंगारी, विजयीपुर थाने के पगरा, मीरगंज थाने के एकडांगा और कुचायकोट थाने के नरहवां में तस्करी पर लगाम लगाने के लिए चेकपोस्ट बनाए गए हैं।
-

बिहार बार्डर पर ही पकड़े जाने की मुख्य वजह
गोपालगंज बार्डर पर गिरफ्तार अधिकतर तस्कर हरियाणा, पंजाब या पश्चिमी यूपी के होते हैं। यूपी बिहार सीमा पर स्थित बलथरी चेकपोस्ट पर पकड़े जाने के पीछे मुख्य वजह यह भी है कि शराब तस्करी पर रोक लगाने के लिए बलथरी चेक पोस्ट पर हैंड स्कैनर मशीन लगाई गईं हैं। इसमें वाहनों के अंदर छिपाकर तस्करी कर ले जाई जा रही शराब पकड़ी जाती है। लेकिन, मास्टरमाइंड ने पुलिस की रणनीति और तकनीक पर पानी फेर दिया और तस्करी के लिए नया रास्ता इजाद कर लिया।
-
लंबी दूरी तक शराब तस्करी के लिए तरीके हजार, पुलिस नाकाम
-बड़े शहरों से शराब की तस्करी सामान्य तस्कर की मानसिकता नहीं होती है। इसमें मास्टरमाइंड का हाथ होता है। जब बिहार सीमा पर स्कैनिंग मशीन से अधिकांश शराब तस्कर पकड़े जाने लगे तो तस्करों ने नए तरीके का इजाद कर लिया। कभी ट्रक को मोडिफाई कराकर, कभी प्याज की बोरियो में, कभी बोलेरो की हेडलाइट के भीतर, कभी चारे के अंदर तो कभी जूस के अंदर छिपाकर शराब की खेप भेजनी शुरू कर दी। इससे मशीन शराब को डिटेक्ट नहीं कर पाती और तस्कर आसानी से निकल जाते हैं। इस तरकीब से पिछले दिनों दो बार तस्करों को मशीन नहीं पकड़ पाई। हालांकि, मुखबिरी के आधार गोपालगंज पुलिस ने अगले चेक पोस्ट पर उन्हें पकड़ लिया।

-
लोकसभा चुनाव को लेकर तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए तैयारी पूरी कर लगी गई है। बिहार और आसपास के जिले के अफसरों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई गई है। देवरिया, कुशीनगर और बिहार की पुलिस भी बार्डर पर सक्रिय होगी। किसी भी कीमत शराब की तस्करी रोकी जाएगी। -धवल जायसवाल एसपी कुशीनगर
विज्ञापन


बिहार में रोक के बावजूद शराब की खेप पकड़ी जा रही है। बरामद अवैध शराब यूपी की ही मिल रही है। हरियाणा निर्मित शराब कम पकड़ी जा रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में शराब की खपत को देखते हुए देवरिया और कुशीनगर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठक कर शराब की तस्करी रोकने की रणनीति बनाई जा रही है। मुख्य रास्ते के अलावा बिहार को जोड़ने वाली पगडंडियों और गांव की सड़कों पर भी पुलिस की ड्यूटी लगाई जाएगी। ताकि किसी भी हाल में शराब की खेप बिहार में न आ सके। -स्वर्ण प्रभात, एसपी गोपालगंज
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें